विपक्षी एका पथ की कंक्रीट संकरी गलियां

                                                                                      - शशिधर खान

	



कांग्रेस की ओर से आयोजित गैर-भाजपा दलों को एकजुट करने के लिए बेंगलूरू बैठक से पहले राजनीतिक माहौल बिगड़ गया है । इससे लगता है कि विपक्षी एका पथ की ओर कदम बढ़ानेवले नेताओं को कुछ संकरी कंक्रीट बिछी उबड़-खाबड़ गलियों से भी गुजरना पड़ सकता है । कांग्रेस शासित कर्नाटक की मेजवानी में 17-18 जुलाई को हो रही यह विपक्षी एका बैठक दूसरी है । इसके पहले २३ जून को पटना में ऐसी पहली बैठक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आयोजित की थी । नीतीश कुमार के जद (यू) गठजोड़ में राष्ट्रीय जनता दल के साथ-साथ कांग्रेस भी शामिल है । वामदल बाहर से सरकार को अपना समर्थन दे रहे हैं । 



बेंगलरू बैठक में शामिल होने के लिए कर्नाटक के कांग्रेस नेता उपमुख्यमंत्री डी॰ के॰ शिवकुमार ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को विशेष रूप से आमंत्रित किया है । सोनिया गांधी और ममता बनर्जी एक साथ मंच पर बैठने से परहेज करती हैं । ऐसा प्रायः शरद पवार भी करते हैं । फिर भी महाराष्ट्र में कांग्रेस के साथ शरद पवार का तालमेल कभी-कभी हो जाता है, जहां दोनों के साझा प्रतिद्वंदी शिवसेना और भाजपा को कमजोर करना हो । भाजपा ने जब शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को तवज्जो नहीं दिया तो उद्धव कांग्रेस और एनसीपी को साथ लेकर मुख्यमंत्री बने । फिर उसके जवाब में एकनाथ शिंदे शिवसेना के दूसरे प्रमुख के रूप में उभरे और भाजपा के देवेन्द्र फड़नवीस को साथ लेकर मुख्यमंत्री बने । अभी एनसीपी टूटकर भाजपा-शिवसेना गठजोड़ सरकार के साथ चली गयी । 

विपक्षी एका प्रयास तीन ध्रुवों के बीच चक्कर लगा रहा है - शरद पवार, नीतीश कुमार और ममता बनर्जी । इनमें कई दल ऐसे हैं जो कांग्रेस के साथ खुद को सहज महसूस नहीं करते और कुछ को लगता है कि कांग्रेस को छोड़कर भाजपा के खिलाफ एका मजबूत नहीं होगी । वैसे तो शरद पवार और ममता बनर्जी दोनों कांग्रेस से ही निकले हुए हैं । लेकिन दीदी ने पश्चिम बंगाल में अपनी पकड़ से भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस को भी दरकिनार किया हुआ है । इन दोनों के मुकाबले नीतीश कुमार की विश्वसनीयता ज्यादा संदिग्ध है । क्योंकि भाजपा का साथ छोड़कर बिहार में सबसे मजबूत भाजपा विरोधी राष्ट्रीय जनता दल के साथ नीतीश कुमार के गठजोड़ के अभी ज्यादा दिन नहीं गुजरे हैं । २३ जून को पटना बैठक में ममता बनर्जी जिस तरह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ आजू-बाजू की कुर्सी पर बैठी थी, वैसा बेंगलुरू में शायद ही संभव हो पाए । 








                                       कोथवान रोड, रूपसपुर नहर , दानापुर, पटना – 801503