‘शहरी नक्सली’मुद्दा कानूनी से ज्यादा राजनीतिक

                                                                                                 - शशिधर खान

	



नक्सली गुट सीपीआई (माओवादी) से कर्थित संपर्क के आरोप में उम्र कैद की सजा काट रहे दिल्ली यूनिर्विर्सटी के पूर्व प्रोफेसर जी एन साईबाबा की रिहाई नहीं हो पायी । मेडिकल आधार पर साईबाबा की रिहाई का आदेश बॉम्बे हाईकोट्र की नागपुर खंडपीठ ने दिया था और गैरकानूनी गतिविधि रोक एक्ट (यूएपीए) के कठोर प्रावधानों के तहत साईबाबा के खिलाफ मुकदमा चलाने पर सवाल उठा दिया ।

महाराष्ट्र सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को तुरंत सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और डीयू प्रोफेसर की रिहाई पर स्टे की चाचिका लगायी । सुप्रीम कोर्ट में तत्काल याचिका स्वीकार की गयी और त्वरित कार्रवाई हुई । शनिवार, १५ अक्टूबर को अवकाश के दिन सुप्रीम कोर्ट जज एम॰ आर॰ शाह और बेला एम॰ त्रिवेदी की पीठ ने विशेष बैठक में सुनवाई करके बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को निलंबित कर दिया । साईबाबा नागपुर सेंट्रल जेल से बाहर नहीं निकल गए । सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे देने से पहले इन्कार कर दिया । महाराष्ट्र सरकार ने फिर बरी किए जाने के खिलाफ याचिका लगायी । 

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिला जज ने 2017 में जी॰ एन॰ साईबाबा और उनके साथ पांच अन्य को भी कथित माओवादी (नक्सल) लिंक होने के कारण उम्र कैद की सजा सुनाई थी । 

बॉम्बे हाईकोर्ट ने साईबाबा की ओर से दायर निचली अदालत के फैसले को चुनौती देनेवाली याचिका स्वीकार करते हुए उनकी रिहाई का आदेश १४ अक्टूबर को दिया । नागपुर खंडपीठ के दोनों जजों ने कहा कि आरोपित के खिलाफ यूएपीए के सख्त प्रावधानों के अंतर्गत मुकदमा चलाना ‘कानूनी तौर पर गलत और अमान्य’था । 

सुप्रीम कोर्ट जजों ने बॉम्बे हाईकोर्ट के बटी आदेश को निलंबित करते हुए कहा की हाईकोर्ट इस मामले की मेरिट के अंदर नहीं गयी, मेरिट वाले पहलू पर गौर नहीं किया । जी॰ एन॰ साईबाबा के वकील ने घर में नजरबंद रखने का आग्रह किया तो उसका भी सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने विरोध किया । अब इस मामले की अगली कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट में 8 दिसंबर को होगी । 



भरूच जिले के आदिवासी बहुल आबादी इलाके में 10 अक्टूबर को प्रधानमंत्री ने अपने चुनावी संबोधन में जनजातीय समुदाय को सावधान किया कि ‘अर्बन नक्सल’के झांसे में न आएं, जो भेष बदलकर पहुंचे हुए हैं । 10 अक्टूबर को ही उसी इलाके में अरविंद केजरीवाल ने चुनावी सभा आयोजित करके भाजपा से आदिवासियों को सावधान करते हुए कहा - वे लोग आपकी जिंदगी बर्बाद करने के लिए विदेशी ताकतों को ला रहे हैं । 


ये था, प्रधानमंत्री का २३ सितंबर का संबोधन भाषण, जिसे उन्होंने 10 अक्टूबर को गुजरात के ही चुनाव सभा में दुहराया ।

अब देखिए कि १५ अक्टूबर को जीएन साईबाबा मामले पर सुनवाई के लिए बैठी सुप्रीम कोर्ट बेंच के सामने महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने क्या कहा । सोलिसिटर जनरल भारत सरकार का पक्ष रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पेश होते हैं । ‘शहरी नक्सली’ साईबाबा के वकील आर॰ बसंत ने अपने मुवक्किल की मेडिकल आधार पर घर में नजरबंदी का आग्रह किया । उसका विरोध करते हुए सोलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में जो दलील दी, उसे ज्यो-का-त्यों उन्हीं के शब्दों में प्रस्तुत किया जा रहा है - ‘घर में नजरबंदी का ऐसा आग्रह नक्सलों, शहरी नक्सलों (अर्बन नक्सल) की ओर से हमेशा आता है । इस तरह के सारे अपराध काफी गंभीर हैं, क्योंकि देश की अखंडता और संप्रभुता के खिलाफ किए गए हैं । हवीलचेयर पर चल रहे साईबाबा को फरवरी, २०१४ में दिल्ली से यूएपीए है । धाराओं के अंतर्गत गिरफ्तार किया गया था उसके पहले पांच अन्य - महेश टिर्की, हेम मिश्रा, पांडू नरोटे, विजय टिर्की और प्रशांत राही को २०१३ में गिरफ्तार किया गया था । नरोटे की न्यायिक हिरासत में मौत हो गयी । 10 साल की सजा पानेवाले विजय टिर्की जमानत पर छूटे हैं । बाकी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं । बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अगर अन्य किसी मामले में जरूरत न हो तो सभी को रिहा किया जाए । 

‘शहरी नक्सली के भाजपाई नजरिए पर गौर करने के लिए इस वर्ष फरवरी में संसद के बजट में प्रधानमंत्री के भाषण की पंक्तियों को खंगालते हैं । फरवरी, २०२२ में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के बजट सत्र के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब प्रधानमंत्री ने यों दिया । 



२०१८ में महाराष्ट्र के ही भीमा कोरेगांव हिंसा में शामिल वाम रूझानवाले इतिहासकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं वकीलों की गिरफ्रतारी का मामला पूरे उफान पर था । उनमें रोमिला थापर, गौतम नवलखा, सुधा भारद्वाज, अरूण परेरा, वारावारा राव, वरनान गोंजाल्विस उस हिंसा को कथित रूप से उकसाने के आरोप में यूएपीए के अंतर्गत ‘देशद्रोह’साजिश में शामिल शहरी नक्सली थे । उनकी जमानत का विरोध करनेवाले सरकारी वकील को अगस्त, २०१८ में सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस दीपक मिश्र ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राजनीतिक विरोध को सुरक्षा कवच बताया और कहा - ‘अगर टोका गया’ तो प्रेशर से कूकर बर्सट कर जाएगा ।’इन शहरी नक्सलियों की ओर से कांग्रेस नेता और वकील अभिषेक मनु संघवी सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए थे । 

अभी 29-09-2022 को गौतम नवलखा को बेहतर इलाज के लिए मुंबई से तलोजा सेंट्रल जेल से जसलोक अस्पताल ले जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में उनकी ओर से अर्जी लगानेवाले वकील हैं - कपिल सिबल ।

१५ अक्टूबर, २०२२ को साईबाबा के वकील ने सुप्रीम कोर्ट पीठ के सामने कहा - मेरे मुवक्किल के खिलाफ आरोप सिर्फ मस्तिष्क (ब्रेन) का है, जो वैचारिकता में शामिल है । उसका जवाब देते हुए एक जज एम॰ आर॰ शाह ने कहा - ‘जबतक माओवादी गतिविधियों की बात है, उसमें तो ब्रेन ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है’।


गत 27-08-2022 को एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) कार्यालय का उद्घाटन करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने इस बात को दुहराया कि दो दशकों में माओवादी हमले में कमी आयी है । 2009 में यह पूरे उफान पर था । छत्तीसगढ़ में २०१८ में १५ साल से चल रही भाजपा सरकार गिर गयी और कांग्रेस सत्ता में आयी । 

भाजपा शासनकाल में २०१३ में छत्तीसगढ़ की झीरम घाटी में हुए माओवादी हमले में मारे गए ३१ लोगों में कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं का सफाया हो गया ।