नगा शांति वार्ता में गतिरोध का दोषी कौन
(दीमापूर से लौटकर शशिधर खान)
- शशिधर खान
एनएससीएन (IM) प्रतिनिधिमंडल से मिलने के बाद केंद्र के वार्ताकार अक्षय मिश्र ने सात नगा गुटों के संयुक्त मंच एनएनपीजी (नगा नेशनल पोलिटिकल ग्रुप) नेताओं से भी डिमापुर में मुलाकात की । इन गुटों से केंद्र का अलग एग्रीमेंट चल रहा है और उन नगा नेताओं से भी अलग शांति वार्ता अक्षय मिश्र चला रहे हैं । ‘फ्रेमवर्क एग्रीमेंट’3/08/2015 का है, जो केंद्र सरकार ने दिल्ली में सिर्फ एनएससीएन (मुइवा गुट) के साथ किया हुआ है । उस समय से जारी शांति वार्ता गतिरोध पर अटकी है । नगा नेता वार्ता के बाद चुपचाप निकल जाते हैं । फिर उनका अपने हेडक्वार्टर डिमापुर से बयान आता है, जिसमें नगा गुट अपनी ‘विशिष्ट पहचान और संस्कृति’की दुहाई देते हुए ‘अलग झंडा और अलग संविधान’का अड़ियल रवैया छोड़ने को तैयार नहीं हैं ।
07/04/2023 को जब मैं डिमापुर में ही था, उसी समय जानकारी मिली कि केंद्र सरकार के तीन नगा विद्रोही गुटों से संघर्षविराम की अवधि एक साल के लिए फिर से बढ़ायी है । केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से दिल्ली से जारी वक्तव्य के अनुसार ये सारे एनएससीएन से ही निकले गुट हैं, जिनसे अलग-अलग 2021-22 से संघर्षविराम एक-एक साल के लिए चल रहा है, अवधि बढ़ायी जा रही है । इन गुटों से कोई वार्ता की अभी तक रिपोर्ट नहीं है ।
सबसे पुराने और दबंग एनएससीएन (मुइवा गुट) का डिमापूर के हेब्रन में हेडक्वार्टर है और अन्य नगा गुटों के भी अड्डे डिमापूर में ही हैं । अक्षय मिश्र की मुलाकात का भी कोई विवरण नहीं मिल पाया । इसका मतलब गतिरोध बरकरार है ।
डिमापूर में तीन दिन गुजारकर मैं नगालैंड की राजधानी कोहिमा चला गया और वहां भी तीन दिन खोजी अभियान में जुटा रहा । डिब्रूगढ़-नयी दिल्ली राजधानी पकड़ने के लिए फिर वापस 11/04 की रात को डिमापुर लौटा, तब नगा वार्ता की सूचना मिली । डिमापूर में और उसके बाद कोहिमा में भी मुझे बताया जाता है कि जहां जाना हो, जिससे मिलना हो या जो भी काम हो, शाम ६ बजे से पहले कर लें । कारण, ६ बजे के बाद बाजार दुकानें बंद हो जाएंगी, ऑटो-टैक्सी कुछ भी नहीं मिलेगी, सड़कों पर सन्नाटा मिलेगा । नगालैंड से बाहर के लोग (गैर-नागा) बताते हैं कि यह आतंक नगा गुटों का है, जिनकी समानान्तर सरकार की टैक्स वसूली और कानून शाम के बाद लागू हो जाती है ।
बहरहाल, 09/04 को सुबह मैं कोहिमा शहर से २२ किमी दूर खोनोमा गांव पहुंचा । ग्रीन विलेज के नाम से मशहूर खोनोमा गांव नगा विद्रोह के जन्मदाता के पैतृक गांव के रूप में जाना जाता है । भारती की आजादी से पहले ही 1947 में अंगामी जापु फिजो ने अपने संगठन एनएनसी (नगा नेशनलिस्ट काउंसिल) के बैनर तले ‘स्वतंत्र संप्रभु नगा राष्ट्र’स्थापना का एलान कर दिया । फिर उसके बाद 1951 में भारत सरकार के खिलाफ नगा विद्रोह की नींव यह दावा करते हुए रखी कि एनएनसी के ‘जनमत संग्रह’के अनुसार 99% (प्रतिशत) नगा आजादी के समर्थक हैं । उसी आधार पर फिजो के नेतृत्व में इस संगठन से 1952 में पहले आम चुनाव का बायकाट किया । एनएनसी में फूट के बाद 1980 में एनएससीएन (मुइवा गुट - IM ) और 1988 में दूसरी फूट के बाद एनएससीएन (खपलांग -खोले कोन्यक गुट) अस्तित्व में आया ।
एक दर्जन नगा उग्रवादी गुटों से पटे नगालैंड को इस अशांति में झोंकनेवाले फिजो के गांव की कहानी अन्य गांवों से अलग है । खोनोमा गांव में शिक्षा विभाग में कार्यरत विजोले बताते हैं कि इस गांव में कोई उग्रवादी गतिविधि नहीं ।
खोनोमा गांव छात्र संघ का किसी नगा गुट से कोई ताल्लुक नहीं’ जबकि यहीं फिजो पैदा हुए । बकौल बिजोले, नगा शांति वार्ता में गतिरोध को लेकर असंतोष जरूर है । अंग्रेज शासनकाल में भी नगा किसी के अधीन नहीं रहे, ऐतिहासिक कोहिमा युद्ध नगा अंग्रेज सरकार के बीच का था । बाहर से जो भी नगालैंड आते हैं, नगाओं की भावनाओं को समझते हैं, लेकिन भारत सरकार के कोई अधिकारी भावना की कद्र नहीं करते । नगाओं के स्वतंत्र अस्तित्व को स्वीकारे वगैर अंतिम समझौते की उम्मीद नहीं लगती । नगाओं के आपस में गुटबाजी, मगर भारत सरकार से किसी वार्ता की शर्त एक जैसी है । खोनोमा गांव को भारत सरकार ने ग्रीन विलेज के रूप में लिया है । चौराहे पर भारत सरकार के पर्यटन विभाग प्रायोजित 3 करोड़ की 20/10/2005 में रखी गयी आधारशिला खुदी है, जिसका उद्घाटन नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने किया । रियो आज भी मुख्यमंत्री हैं ।
09/04 को ही जानकारी मिलती है कि पूर्वी नगा जिलों के जनजातीय संगठनों का प्रतिनिधित्व करनेवाले ENPO (इस्टर्न नगालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन) की 11-सदस्यीय टीम की अलग ‘फ्रंटियर नगालैंड’राज्य गठन की मांग के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों से वार्ता तय हुई है । गृह मंत्रालय की 3-सदस्यीय कमिटी का नेतृत्व नगा वार्ताकार अक्षय मिश्र करते हैं और बैठक गुवाहाटी में होती है । लेकिन बातचीत का कोई ब्योरा नहीं मिलता ।
जब मैं नगालैंड में हूं, उसी समय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी गुवाहाटी और अरूणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर में हैं । अरूणाचल प्रदेश में चीन को उन्होंने चेतावनी दी और गुवाहाटी में समूचे उत्तर पूर्व में अमन चैन की बात कही ।
नगालैंड के डीजीपी रूपिन शर्मा के हवाले से 13 अप्रील को जानकारी मिलती है कि रक्षा मंत्रालय ने सेना के उन 30 जवानों के खिलाफ मुकदमा चलाने से इन्कार कर दिया, जिनकी 04/12/2021 की रात फायरिंग में ६ खान मजदूर मारे गए । केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 06/12/2021 को संसद में इसके खिलाफ हुए भारी हंगामे के बीच बताया कि असम राइफल्स के जवानों ने ‘गलती से नगा उग्रवादी’समझकर गोली चला दी, जिसमें ६ लोग मारे गए । राज्य सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) गठित की, जिसने अपनी तथ्यपरक रिपोर्ट के आधार पर मई, २०२२ में एक मेजर रैंक के अधिकारी समेत 30 जवानों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किए और एक साल बाद अभी अप्रील, २०२३ में रक्षा मंत्रालय ने उनकी इस ‘गलती’के खिलाफ मुकदमा चलाने से इन्कार कर दिया ।
08/04 को दीमापूर में ठेला-रेहड़ी वाला बिहारी बताता है - ‘दो दिन पहले ग्रीनबोट कोलनी नं- 3 में लफड़ा हुआ, जहां हम ज्यादा संख्या में रहते हैं । वसूली का विरोध करने पर नगाओं ने कोलनी बंद कर दिया । हमलोग आपस में चंदा करके 80,000 रूपया दिया, तब किसी को बाहर निकलने दिया ।
04/12/2021 की असम राइफल्स फायरिंग ओटिंग गांव में ही हुई थी और वहीं से उसी समय अलग ‘फ्रंटियर नगालैंड’की मांग उठी । 09/04/2023 के सम्मेलन में ओटिंग गांव में मुख्यमंत्री के साथ ईएनपीओ नेतागण मौजूद थे । इन नेताओं ने फरवरी, २०२३ में नगालैंड विधान सभा चुनाव का बायकाट करने का फैसला किया था । अमित शाह के आश्वासन पर उनलोगों ने बायकाट वापस लिया । 12/09/2022 को दिल्ली में अमित शाह के साथ नगा उग्रवादियों की बैठक में मुख्यमंत्री नेफियू रियो मौजूद थे । वार्ताकार अक्षय मिश्र भी थे ।
आर॰ एन॰ रवि को सितंबर, २०२१ में जब नगालैंड से हटाकर तमिलनाडु का राज्यपाल बनाया गया, तब उन्होंने नगा वार्ताकार पद से इस्तीफा दे दिया । उसके बाद से वार्ताकार का जिम्मा संभालनेवाले अक्षय मिश्र ने सात नया उग्रवादियों के मंच एनपीजी नेताओं से 15/10/2021 को दिल्ली में पहली मुलाकात की ज्यादातर उग्रवादी पूर्वी नगालैंड से हैं ।
इस गतिरोध के लिये कौन जिम्मेदार है, यह पाठकों पर छोड़ता हूं । जिन्होंने मेरी अमन प्रकाशन से छपी ताजा किताब ‘भारत की लाइलाज खाज: नगा संकट’देखी होगी, उन्हें यह रिपोर्ताज पकड़ने में आसानी होगी । Archive quality note: This text is readable and verified for publication, but minor Unicode or source-quality imperfections may remain.
विषय
Internal Security Nagaland
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प्रकाशन संदर्भ: Prabhat Khabar
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