‘आजादी’फोबिया रोड़ा है नगा फाइनल डील में
- शशिधर खान
‘स्वतंत्र संप्रभु ग्रेटर नगालिम’की मांग पर अड़े उत्तर पूर्व के सबसे दबंग उग्रवादी गुट नेशनल सोसलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (एनएससीएन - आईएम IM) नेता टी॰ मुइवा ने कहा है कि ‘अलग झंडा और संविधान’पर कोई दुविधा नहीं है, जिसे नगा फाइनल डील में रोड़ा बताया जा रहा है ।
‘स्वतंत्र संप्रभु ग्रेटर नगालिम संघीय सरकार’के स्वयंभू प्रधानमंत्री (नगा भाषा में ‘अटो किलोन्सेर’) के रूप में अपनी आजादी की 77वीं वर्षगांठ के अवसर पर टी॰ मुइवा ने यह स्थिति स्पष्ट की । भारतीय स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले १४ अगस्त को मुइवा ने एनएससीएन के दीमापुर स्थित हेब्रन हेडक्वार्टर में अपना झंडा फहराया और अपनी सेना की सलामी ली । मुइवा अपने गुट एनएससीएन (IM) के महासचिव हैं और नगालिम सरकार में ‘प्रधानमंत्री’हैं । एनएससीएन का दावा है कि नगाओं ने 1947 में भारत की आजादी से पहले की अपनी आजादी का एलान कर दिया था और अलग ‘स्वतंत्र संप्रभु नगालिम राष्ट्र’की स्थापना हो गयी थी । इसलिए हर साल अगस्त में एनएससीएन भारतीय स्वतंत्रता दिवस समारोह से अलग ‘नगा स्वतंत्रता दिवस’समारोह से नगा नेता मीडिया को दूर रखना पसंद करते हैं । दीमापुर के लोगों को भी इससे कोई सरोकार नहीं है । इसलिए ‘नगा स्वतंत्रता दिवस’समारोह की नगा सैनिकों के परेड और झंडे की सलामी के साथ स्वयंभू ‘अटो किलोन्सेर’(प्रधानमंत्री) के संबोधन की खबर हर साल की तरह अबकी भी देर से आयी । ‘अटो किलोन्सेर’मुइवा ने दुहराया कि भारत सरकार के साथ 03-08-2015 फ्रेमवर्क डील के बावजूद कोई भ्रम की स्थिति नहीं है ।
एनएससीएन (IM) नेता ने एक प्रकार से यह भी माना कि अगस्त, 2015 फ्रेमवर्क डील के फाइनल डील तक पहुंचने के रास्ते में ‘अलग झंडा और संविधान’का हठ रोड़ा है, मगर उनके दावे से जाहिर है कि इस रोड़ा को रास्ते से हटाना नहीं चाहते । मुइवा ने दावा किया कि भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर माना है कि नगाओं के अधिकार फाइनल डील में शामिल किए जाएंगे । एनएससीएन जिस अधिकार की बात करता है, उसमें समूचे उत्तर पूर्व और पड़ोसी म्यांमार के सारे नगा आबादी वाले इलाके ‘ग्रेटर नगालिम’के प्रशासनिक नियंत्रण में आ जाएं, तथा संचालक मुइवा हों । एनएससीएन की यह पुरानी मांग है, जिसे भारत सरकार से पूरी करवाने में वे एक स्वतंत्र संप्रभु राष्ट्र की तरह अलग झंडा और संविधान पर जोर देता है । यह ऐसी मांग है, जो भारत सरकार कभी पूरी नहीं कर सकती । क्योंकि भारत के संवैधानिक ढांचे के अंतर्गत दूसरे संविधान और राष्ट्रीय झंडे को मान्यता देने का प्रावधान नहीं है । धारा-370 समाप्त करके कश्मीर का अलग झंडा और संविधान हटाकर इस राज्य को पूरी तरह भारतीय संघ में शामिल होते देखने के बावजूद नगा गुट आजादी फोबिया से मुक्त नहीं हो पा रहे हैं ।
एनएससीएन (आईएम) के अलावे सात अन्य नगा गुटों के साथ भी केंद्र सरकार का संघर्षविराम समझौता चल रहा है । इन गुटों के संयुक्त मंच एनएनपीजी (NNPG- नगा नेशनल पोलिटिक्स ग्रुप) आजादी फोबिया वाले अलग झंडा और संविधान के मुद्दे पर लचीला रवैया अपनाने के पक्ष में है, ताकि नगा राजनीतिक मसले का फाइनल हल निकालने में यह शर्त बाधक न बने । सबसे पुराने और दबंग होने के कारण एनएससीएन (IM) की इस जिद के आगे अन्य गुटों की चल नहीं पा रही है, जिसके चलते वार्ता का हर दौर बेनतीजा साबित हो रहा है ।
उबलते मणिपुर के उस नगा समुदाय वाले उखरूल जिले से 18 अगस्त को हिंसा में तीन लोगों की मौत की खबर आयी, जहां एनएससीएन(IM) दबदबा का दावा करता है । हिंसा 03 मई से जारी है । नगा प्रभुत्ववाले उखरूल जिले में वो पहला हमला था । १५ अगस्त को मणिपुर में आयोजित स्वतंत्रता दिवस परेड में लोगों के एक समूह द्वारा अत्याधुनिक हथियारों के प्रदर्शन पर राज्य सुरक्षा सलाहकार कुलदीप सिंह ने सबसे ज्यादा हिंसा प्रभावित चुराचांदपुर जिले के अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी ।
१५ अगस्त समारोह के अलगे दिन मणिपुर हिंसा के मामलों की जांच के लिए सीबीआई टीम गठित की गयी और उसी दिन कुकी-जोमी विधायक प्रधानमंत्री से मिले ।
जब मणिपुर मुद्दे पर हंगामे के कारण संसद नहीं चल पा रही थी, उसी समय 09 अगस्त को गृहमंत्री अमित शाह ने कुकी नेताओं से शांति के लिए सहयोग मांगा । उस दिन मणिपुर में नगा समुदाय के हजारों लोगों ने रैलियां निकाली । उसका मकसद ढांचागत समझौते के आधार केंद्र-नगा समूहों के बीच शांति वार्ता का सफल समापन अर्थात् फाइनल डील पर बल देना था ।
नगा वार्ता ठप्प है । केंद्र की ओर से नगा वार्ताकार अक्षय कुमार मिश्रा को अब दो कुकी गुटों से समझौता वार्ता का काम सौंपा गया है । 17 अगस्त को कुकी नेताओं ने दिल्ली में गृह मंत्रालय के अधिकारियों से और अक्षय मिश्र से मुलाकात की ।
12-04-2023 के बाद से कोई नगा वार्ता की रिपोर्ट नहीं है । मुलाकातें होती भी हैं तो प्रायः दोनों पक्ष चुप रहते हैं । 12/04 को दीमापुर पुलिस परिसर में पांच महीने के अंतराल के बाद वार्ता आयोजित की गयी, जिसमें शामिल होने एनएससीएन (IM) नेता मुइवा २० सदस्यों की टीम के साथ पहुंचे । उस दिन अपने नगालैंड दौरे के क्रम में दीमापुर में ही मैंने भी डेरा डाल रखा था । उसका आंखोंदेखा कानों सुना हाल आजादी फोबिया से ग्रस्त नगा उग्रवाद की असलियत खोलता है । दो घंटे चली बैठक पहले की तरह बेनतीजा रही । फ्रेमवर्क डील के आधार पर ‘फाइनल डील’की बात कही गयी ।
उसके पहले ९ अप्रील को मैं राजधानी कोहिमा से २२ किमी दूर खोनोमा गांव पहुंचा । नगा विद्रोह के जन्मदाता और नगा आजादी का भारत से पहले एलान करनेवाले अन्गामी फिजो का गांव है । खोनोमा गांव में शिक्षा विभाग में कार्यरत विजोले और उनके साथ मिले कुछ लोग बताते हैं - ‘फिजो के पैतृक गांव में कोई उग्रवादी गतिविधि नहीं । इस गांव के एक भी युवक का किसी उग्रवादी गुट से ताल्लुक नहीं है ।’लेकिन साथ में यह भी कहा - ‘बाहर से जो लोग आते हैं, नगा भावनाओं को समझते हैं, भारत सरकार के कोई अधिकारी नगा भावनाओं की कद्र नहीं करते । नगाओं के स्वतंत्र अस्तित्व को स्वीकारे बगैर फाइनल डील की उम्मीद नहीं लगती’नगाओं में आपस में गुटबाजी, मगर अंतिम समझौते की शर्त एक जैसी है ।’
फिजो द्वारा आयोजित ‘नगा स्वतंत्रता’की 77वीं वर्षगांठ मनानेवाले उन्हीं के गुट से निकले एनएससीएन नेता टी॰ मुइवा को भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है । 1952 में पहले आम चुनाव में हिस्सा लेने के लिए भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सिंह ने व्यक्तिगत रूप से फिजो से आग्रह किया था । लेकिन फिजो ने अपने जनमत संग्रह का हवाला देकर कहा कि 99% नगा अलग स्वतंत्र अस्तित्व के पक्ष में है ।
फिजो ने विद्रोही हिंसा भड़कायी, जिसे दबाने के लिए प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने सेना भेजी । आम चुनाव के बाद वार्ता के लिए आमंत्रित कर 1952 में फिजो के सामने पं॰ नेहरू ने वर्तमान और भविष्य का खाका रखते हुए कहा - ‘अलग स्वतंत्र संप्रभु नगालिम मैं तो क्या भारत का कोई भी प्रधानमंत्री नहीं दे सकता ।’
दरअसल ये कहने के लिए शांति वार्ता है, क्योंकि हिंसा का दबदबा बरकरार है । पहलीबार एनएससीएन (IM) ने मुंह खोला, जब कुकी-मेइती हिंसा मणिपुर के नगा आबादी वाले जिलों में भड़की ।
नगाओं के स्वयंभू भाग्य विधाता एनएससीएन (IM) ने २० अगस्त को शांति की अपील नहीं की, उल्टे एक चेतावनी वक्तव्य जारी करके कहा - ‘मेइती-कुकी जातीय हिंसा के नाम पर नगा इलाके में हत्याएं बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नगाओं पर हमले के गंभीर परिणाम हो सकते हैं । Archive quality note: This text is readable and verified for publication, but minor Unicode or source-quality imperfections may remain.
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Internal Security Nagaland
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