मणिपुर हिंसा पर प्रधानमंत्री की सबको चुप्पी खटक रही

                                                                                      - शशिधर खान

	








प्रधानमंत्री से मिलने दिल्ली पहुंचनेवाले विधायकों में भाजपा के कुकी-जोमी और मेइतेई आदिवासी समुदाय के भी थे । आखिरकार रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने उन्हें समय दिया । गृहमंत्री अमित शाह भी नहीं मिले । अमित शाह भी हिंसा के तीन हफ्ता गुजर जाने के बाद बेकाबू होने की नौबत आने के बाद मई के अंत में इंफाल जाने का समय निकाल पाए । 29 मई से 01 जून तक का केंद्रीय गृह मंत्री का अन्य सभी पीड़ित कुकी-जोमी और मेइतेई समुदायों का विश्वास जीतने के प्रयास में गुजरा । राज्य पुलिस बल, असम राइफल्स और केंद्रीय बलों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए अमित शाह ने यूनिफाईड कमांड बनाया । सभी समुदायों में सहयोग और सद्भाव कायम करने के लिए राज्यपाल अनुसुइया उइके की अध्यक्षता में 51-सदस्यीय शांति समिति गठित की गयी । लेकिन मामला पटरी पर आने के बजाए और नीचे ही उतरता गया । पहले तो कुकी समुदाय के लोगों ने मणिपुर के मुख्यमंत्री एन॰ बीरेन सिंह के शांति समिति में शामिल होने पर आपत्ति की । कुकी के साथ-साथ मेइतेई समुदाय के लोगों ने भी यह कहकर शांति कमिटी के बायकाट का फैसला किया कि मुख्यमंत्री और उनके समर्थकों को इसमें शामिल करने से पहले उनसे विमर्श नहीं किया गया । 10 जून को अमित शाह की यह शांति योजना लेकर असम के भाजपा मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा इंफाल पहुंचे, जबकि उनके विषय में पहले से ही चर्चा थी कि एन॰ बीरेन सिंह की तरह मेइतेई समुदाय का साथ दे रहे हैं । यूनिफाईड कमांड के एक अधिकारी के अनुसार कुकी और मेइतेई मतभेद का असर राज्य पुलिस पर भी पड़ा है । पुलिसकर्मी अपने-अपने समुदाय का पक्ष ले रहे हैं । 

मणिपुर हाईकोर्ट के 27 मार्च के आदेश के अनुपालन के खिलाफ निकले विभिन्न आदिवासी समुदायों के जुलूस के बाद 03 मई से यह हिंसा उफनी है । मणिपुर हाईकोर्ट ने मेइतेई समुदाय को एसटी का दर्जा देने के लिए केंद्र सरकार के पास अनुशंसा चार हफ्ते में भेजने का निर्देश दिया था । मुख्यमंत्री स्वयं मेइतेई समुदाय के हैं । हालात बिगड़ते जाने के बाद अब मुख्यमंत्री हाईकोर्ट से राहत मांग रहे हैं । मणिपुर ट्राइबल फोरम, दिल्ली ने २० जून को सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर कुकी आदिवासियों को सेना की सुरक्षा के लिए तुरंत सुनवाई की गुहार लगायी । सुप्रीम कोर्ट ने ‘लक्ष्मण रेखा (सीमा) का उल्लंघन’ सरकारी जुमला का ख्याल करके इसे पूरी तरह कानून व व्यवस्था का मामला बताते हुए शांति के लिए प्रशासन पर ही भरोसा जताया और कहा कि कोर्ट के हस्तक्षेप से स्थिति ज्यादा बिगड़ सकती है । अर्जी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गयी । मणिपुर हाईकोर्ट के आदेश को ऑल मणिपुर ट्राइबल यूनियन की ओर से चुनौती देनेवाली याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अपनी सफाई में कहा कि वो किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है, और समय चाहिए । 



लगता है, कांग्रेस की सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल मणिपुर जाने की मांग का असर हुआ । असम के मुख्यमंत्री ने भी दिल्ली आकर अमित शाह को २१ जून को रिपोर्ट किया और गृहमंत्री ने सर्वदलीय बैठक बुलाने की तारीख २४ जून प्रधानमंत्री के स्वदेश लवतने के हिसाब से रखी । प्रधानमंत्री मणिपुर समाधान की जगह अमेरिका में निवेशकों को तलाशने और मणिपुरवासियों का दर्द साझा करने के बजाए अमेरिका से व्यापारिक साझेदारी में जुटे रहे ।




                                       कोथवान रोड, रूपसपुर नहर , दानापुर, पटना – 801503