गोरखालैंड राज्य आंदोलन अब ढलान की ओर
- शशिधर खान
अभी 18 से २२ सितंबर तक चले संसद के विशेष सत्र से तीन दिन पहले राजू बिस्टा दार्जीलिंग में घूम रहे थे । इसके बाद संसद का सिर्फ दो सत्र होगा, जो पूरी तरह २०२४ आम चुनाव पर केंद्रित होगा । राजू बिस्टा ने स्पष्ट संदेश दे दिया कि उनके लिए और भाजपा के लिए अलग गोरखालैंड कोई मुद्दा नहीं है । गोरखों के लिए दार्जीलिंग पहाड़ी की समस्या का गोरखालैंड राज्य गठन की एकमात्र स्थायी राजनीतिक समाधान है ।
भाजपा की नीतियां गोरखालैंड के मामले में सिर्फ इसकी चुनावी लाभ उठाने तक सीमित है । केंद्र में भाजपा नीत राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठजोड़ सरकार का दूसरा कार्यकाल कुछ महीनों में समाप्त होनेवाला है ।
अभी भाजपा पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव में मुख्य विपक्षी दल है और तृणमूल कांग्रेस के बाद सबसे ज्यादा मजबूत पार्टी है । दोनों दलों की राजनीति में इस विंदु पर समानता है कि गोरखा गुटों को एकजुट न होने दिया जाए ।
दीदी के सत्ता में आने के बाद जीजेएम, केंद्र और राज्य सरकार के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते के अंतर्गत गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए) का गठन हुआ । ‘गोरखालैंड’नाम जुड़ जाने से जीजेएम नेता विमल गुरूंग ने इसे गोरखालैंड राज्य गठन की दिशा में एक कदम आगे बताया । लेकिन अब कई कदम पीछे हटने की नौबत है । बिमल गुरूंग के खिलाफ हिंसा के इतने मामले दर्ज हैं कि वे सार्वजनिक रूप से अपने समर्थकों के बीच कुछ बोलने की स्थिति में नहीं है । दीदी राज्य में बिमल गुरूंग ने लंबे समय तक दार्जीलिंग बंद आयोजित करके हिंसा का इतिहास दुहराया । उसका जवाब दीदी ने हिंसा और पुलिस चौकसी अभियान साथ चलाकर दिया । बिमल गुरूंग को पुलिस से बचने के लिए सिक्किम के मुख्यमंत्री गोरखालैंड समर्थक पवन कुमार चामलिंग की पनाह लेनी पड़ी । आज जीजेएम समेत सारे गोरखा गुट के जनाधार में तृणमूल कांग्रेस गहराई तक प्रवेश कर चुकी है । बंद पर भी गुटीय राजनीति हावी है ।
जीजेएम के गढ़ सिलिगुड़ी के मेयर गौतम देव तृणमूल कांग्रेस के हैं । जीजेएम का बिमल गुरूंग विरोधी गुट दीदी के साथ है । एक गोरखा पहाड़ी लड़की के साथ रेप और हत्या के प्रयास के विरोध में २६ अगस्त, २०२३ को आयोजित २४ घंटे के दार्जीलिंग, कलिम्पोंग, कुर्सीओंग बंद में भाजपा और विश्व हिन्दू परिषद शामिल थी । राजू बिस्टा ने सीबीआई जांच की मांग की । सिलिगुड़ी के मेयर बंद के खिलाफ थे । २०१९ में भाजपा ने जीएनएलएफ को फोड़कर उसके नेता नीरज जिम्बा को अपना उम्मीदवार बनाया और राजू बिस्टा उनके लिए चुनाव प्रचार करने पहुंचे । 17.05.2019 को दार्जीलिंग विधान सभा उपचुनाव के दौरान राजू बिस्टा ने ‘गोरखालैंड’का नाम लिया और फिर 25.02.2022 को दार्जीलिंग नगरपालिका चुनाव प्रचार में ‘न्याय’की बात करने लगे - ‘दार्जीलिंग, तराई, डूआर्स के लोगों को अगर मैं २०२४ तक ‘न्याय’नहीं दिला पाया तो राजनीति छोड़ दूंगा और भविष्य में कोई चुनाव नहीं लडूंगा ।’
जीजेएम ने अलग कामतापुर और अलग राजवोंग्शी राज्य की मांग करनेवाले तराई, डूआर्स, कूचबेहार में पसरे आंदोलनकारियों से अपने 20-21 सितंबर दिल्ली धरने में साथ देने की अपील की ।
इन संगठनों ने नोटिस नहीं लिया । संसद में सर्वसम्मति से पारित महिला आरक्षण बिल चर्चा के आगे गोरखालैंड की आवाज सुनने की फिक्र कौन करता । Archive quality note: This text is readable and verified for publication, but minor Unicode or source-quality imperfections may remain.
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Internal Security Gorkhaland
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