एक साथ चुनाव और चुनाव सुधार का राजनीतिक धमर्थन
- शशिधर खान
एक साथ चुनाव की संभावनाओं पर विचार करने के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय कमिटी गठन के समय से ही विवाद के घेरे में है । अभी वैसे समय में रामनाथ कोविंद ने सफाई देकर राजनीतिक दलों को आश्वस्त करने का प्रयास किया है, जब पांच राज्यों में विधान सभा चुनावों हो रहे हैं । कोविंद के स्पष्टीकरण पर लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधुरी ने तुरंत अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा - ‘यह भाजपा का पार्टी एजेंडा है ।’
चौधुरी ने उच्चस्तरीय कमिटी के गठन 02-09-2023 को ही इसका सदस्य बनने से यह कहकर इन्कार कर दिया कि सूचना उन्हें मीडिया से मिली ।
केंद्र की भाजपा गठजोड़ सरकार ने जब यह कमिटी गठित की उस समय चर्चा गरम थी कि चुनाव आयोग छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान और मिजोरम विधान सभा चुनाव तारीखों की घोषणा कभी-भी कर सकता है ।
सभी दलों ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी, लेकिन किसी भी पार्टी ने केंद्र सरकार के एक साथ चुनाव पर विचार करने के प्रस्ताव का स्वागत नहीं किया । उल्टे लोकसभा चुनाव करीब होने के समय ऐसी कमिटी गठित करने के औचित्य पर सवाल उठाए ।
प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस का विरोध तो अधिसूचना जारी होने के समय ही उजागर हो गया । अधिसूचना के अनुसार रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में गठित 8-स्तरीय कमिटी के सदस्यों में गृहमंत्री अमित शाह, राज्यसभा में पूर्व विपक्षी नेता गुलाम नबी आजाद, पूर्व वित्त आयोग अध्यक्ष एन॰ के॰ सिंह, सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे, पूर्व लोकसभा सेक्रेटरी जनरल सुभाष सी॰ कश्यप, पूर्व सतर्कत्ता आयुक्त संजय कोठारी के अलावे लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधुरी भी शामिल किए गए । कानूनी मामलों के सचिव नितेन चन्द्रा सचिव बनाए गए और यह व्यवस्था की गयी कि कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल उच्चस्तरीय कमिटी की बैठकों में मौजूद रहेंगे । केंद्र सरकार ने विधि आयोग की 170वीं रिपोर्ट का हवाला अधिसूचना में दिया कि - ‘हर साल चुनाव का चक्र बंद किया जाना चाहिए ।’ बल्कि कांग्रेस नेता या अन्य दलों को कोई फर्क नहीं पड़ा । बल्कि कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधुरी का उच्चस्तरीय कमिटी का सदस्य बनने से इन्कार करने की चर्चा विभिन्न हलकानों में दिखी ।
लोकसभा और विधान सभाओं के साथ-साथ नगरपालिकाओं तथा पंचायतों का भी चुनाव कराने की संभावनाओं पर विचार करने के लिए गठित इस कमिटी की पहली बैठक 23/09 को नयी दिल्ली में रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में हुई । बैठक में तय हुआ कि इस संबंध में अभी राजनीतिक दलों से विचार-विमर्श के लिए एक एक्शन प्लान तैयार किया जाए ।
उसके दो हफ्ते बाद 09 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने पांच राज्यों में चुनाव कार्यक्रम का एलान कर दिया । पहले से ही असहमत राजनीतिक दलों का ध्यान उस तरफ चला गया ।
अभी इस हफ्ते २० नवंबर को रामनाथ कोविंद ने इस चर्चा को दुहराया, जब राजनीतिक दल विधान सभा चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं । कोविंद ने रायबरेली में संवाददाताओं से बातचीत इसी सफाई से शुरू किया कि एक साथ चुनाव दलगत भावना से परे देश के और जनता तथा केंद्र के हित में है । उन्होंने कहा - ‘हम सब से आग्रह कर रहे हैं कि आप हमें अपना सकारात्मक सहयोग इसमें दीजिए । इससे जो भी दल केंद में सत्ता में होगा, उसको फायदा होगा - वो चाहे भाजपा हो, कांग्रेस हो या दूसरे राजनीतिक दल हों ।’
वोटरों को अंधेरे में रखकर मतदान का प्रतिशत नहीं बढ़ाया जा सकता । चुनाव बांड योजना से उठे विवाद पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखने के दिन 02 नवंबर को बड़ी सटीक टिप्पणी की । चीफ जस्टिस डी॰ वाई॰ चन्द्रचूड़ ने केंद्र सरकार की दलील पर एतराज करते हुए कहा - ‘यह स्वीकार करना कठिन है कि मतदाता को राजनीतिक दलों की फंडिंग का स्रोत जानने का अधिकार नहीं है । २०१८ की चुनावी बांड योजना की सबसे विचित्र बात ये है कि विपक्षी दलों की फंडिंग तो लोग जान सकते हैं, लेकिन सत्तारूढ़ दल का स्रोत गोपनीय रहेगा ।’
उसके बाद 09 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट को ही सभी हाईकोर्टों के मुख्य न्यायाधीशों को लिखना पड़ा कि दागी संसद सदस्यों, विधायकों के खिलाफ चल रहे मुकदमे जल्दी निबटाएं । दागी उम्मीदवार मुकदमे लंबित रखने के उपाय लगाकर चुनाव लड़ते रहते हैं । भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय की ही याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के हाथ खड़े कर देने के बाद 25-09-2018 को सभी राजनीतिक दलों को निर्देश दिया कि अपने उम्मीदवारों के आपराधिक रिकार्ड अखबारों में प्रकाशित करें और उन्हें चयन करने का कारण भी बताएं । सुप्रीम कोर्ट को भी आखिरकार जनता की अदालत में ही मामला भेजना पड़ा ।
एक साथ चुनाव योजना लागू करने के लिए पांच संविधान संशोधन जरूरी है । यह बात चुनाव आयोग और विधि आयोग सरकार को बात चुका है कि मौजूदा संवैधानिक ढांचे में एक साथ चुनाव संभव नहीं है । यह तो सरकार शायद कर डाले, मगर दागियों को चुनाव लड़ने से रोकने का सिर्फ एक संशोधन लगातार चल रहा है । वर्तमान विधि आयोग अध्यक्ष जस्टिस रितु राज अवस्थी से एक साथ चुनाव पर विमर्श वाली उच्चस्तरीय कमिटी की 25-10-2023 को क्या बात हुई, यह तो कमिटी जाने ।
मगर20-11-2023 को चुनाव आयेाग ने जो बताया कि अभी पांच राज्यों में चल रहे चुनाव के दौरान 1,760 करोड़ रूपये की नशीली दवाएं, नगद, शराब, कीमती और वोट लुभावन वस्तुएं जब्त की गयी हैं । ये पैसा किस स्रोत से आया । क्यों न माना जाए कि पार्टियों की फंडिंग का पैसा है ? Archive quality note: This text is readable and verified for publication, but minor Unicode or source-quality imperfections may remain.
विषय
Politics, Governance and Administration Election Commission
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