बढ़ रहा है धर्मान्तरण पर कानूनी विवाद
- शशिधर खान
जबरन या प्रलोभन देकर धर्मान्तरण रोकने वाले कानून की अधिसूचना हरियाणा सरकार द्वारा जारी किए जाने के साथ ही मध्य प्रदेश और उत्तराखंड ने गत महीने नवंबर में ही धर्मान्तरण विरोधी कानून बनाया है । उसके पहले २०२० में उत्तर प्रदेश सरकार ने धर्म परिवर्तन अध्यादेश जारी किया था । लगभग उसी के तर्ज पर मध्यप्रदेश और उत्तराखंड की सरकारों ने दोबारा पूर्ण बहुमत से २०२२ में सत्ता में आ जाने के बाद बनाया ।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने ऐसे समय में धर्मान्तरण विरोधी कानून की अधिसूचना जारी की है (9/12/2022), जब सुप्रीम कोर्ट में इस पर सुनवाई चल रही है । सुप्रीम कोर्ट में जबरन प्रलोभन देकर धर्मान्तरण कराने के मामले में इसके अनुसूचित जाति (एससी) दर्जे वाले पहलू पर खास तौर पर विचार किया जा रहा है ।
केंद्र सरकार ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस के॰ जी॰ बालाकृष्णन की अध्यक्षता में तीन-सदस्यीय आयोग की नियुक्ति की हुई है । इस आयोग को दलितों के हिन्दू, सिख और इसाई धर्म छोड़कर अन्य धर्म अपनाने की स्थिति में उनके एससी दर्जे का क्या होगा, यह तय करना है । विवाद मुख्य रूप से दलितों के इस्लाम और इसाई धर्म अपनाने को लेकर है कि धर्मान्तरण के बाद उनका अनुसूचित जाति का दर्जा बरकरार रखा जाए अथवा नहीं ।
इसाई बने दलितों की संख्या एनसीडीसी (नेशनल कांउसिल ऑप दलित क्रिश्चियन्स) सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके २०२० को इस पर सुनवाई के बाद केंद्र ने 07/10/2022 को इस पर विचार करने के लिए आयोग का गठन किया । केंद्रीय सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार भारत के पूर्व सीजेआई (प्रधान न्यायाधीश) के॰ जी॰ बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाला यह आयोग 2 वर्षों में अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपेगा । इसाई धर्म अपनाने वाले दलितों की ओर से और भी कई मामले सुप्रीम कोर्ट में कई वर्षों से आने के बाद केंद्र ने यह आयोग गठित किया । 05/12/2022 को इस संबंध में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट जज एम॰ आर॰ शाह और जस्टिस सी॰ टी॰ राजकुमार की पीठ ने प्रलोभन/लालच देकर और जबरन धर्मान्तरण को ‘बेहद गंभीर’मामला बताते हुए कहा कि इसका देश की सुरक्षा पर भी असर हो सकता है ।
सुप्रीम कोर्ट पीठ एक और याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें ऐसे धर्मान्तरण रोकने के लिए केंद्र तथा राज्यों को कड़े कदम उठाने के लिए निर्देश देने का आग्रह किया गया है । यह याचिका वकील और भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने दायर की हुई है । १४ नंवबर को केंद्र सरकार की ओर से सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता से संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने के बाद 07/12/2022 को भी केंद्र के आयोग की रिपोर्ट का इंतजार करने की दलील सुनकर सुप्रीम कोर्ट ने इस पर गंभीर रवैया अपनाया ।
अब जनवरी, २०२३ में सुप्रीम कोर्ट इस पर विचार करेगी कि पूर्व सीजेआई की रिपोर्ट का 2 साल तक इंतजार किया जाए या नहीं । जस्टिस एम आर शाह की पीठ ने ५ दिसंबर को कहा कि दवाएं, अनाज देकर धर्म परिवर्तन का प्रलोभन गंभीर मसला है । परोपकार और भलाई तो अच्छा है, लेकिन धर्मान्तरण के मकसद से परोपकार नहीं हो सकता है । दलितों के इसाई बनाने को लेकर ही मुख्य रूप से इससे जुड़े ये सारे पहलू सामने आए हैं ।
हाल में सुर्खियों में आया यह मामला कई दशकों से विवादास्पद बना हुआ है । लगभग समुचा आदिवासी बहुल उत्तर पूर्व इस विवार की गिरफ्रत में है, जिससे उनकी संस्कृति के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक जनजीवन की दशा-दिशा बदल गयी है ।
हरियाणा सरकार द्वारा 19 दिसंबर को जारी अधिसूचना के अनुसार इस धर्मान्तरण रोक कानून में अनुसूचित जाति/जनजाति के मामले में जिला मजिस्ट्रेट को अलग से निर्देश दिए गए हैं । स्वेच्छा से धर्म बदलने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने का प्रावधान सशर्त है । वैसा करनेवालों को अन्य विवरणों के अलावे यह भी बताना होगा कि वे एससी/एसटी समुदाय के हैं या नहीं और धर्मान्तरण का कारण क्या है ।
19 नवंबर को ही उत्तर प्रदेश पुलिस ने लखनऊ में एक महिला समेत चार विदेशियों (ब्राजील मूल के) को पकड़ा, जो सीतापुर जिले में इसाई धर्म अपनाने के लिए लालच देकर समझा रहे थे । उसके पहले 02 नवंबर को भाजपा शासित कर्नाटक के रामनगर जिले से रिपोर्ट मिली कि हिंदू आदिवासियों का सामूहिक धर्मान्तरण कराने का प्रयास करते हुए इसाई समुदाय के 12 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया ।
धर्मान्तरण कानून को लेकर राजनीतिक और कानूनी विवाद साथ-साथ बढ़ रहे हैं । हालातों पर गौर करने से लगता नहीं कि धर्मान्तरण रोकना किसी कानून के वश का है । इसमें पुलिस, कोर्ट, राजनीति सब शामिल है । मगर धर्मान्तरण एक नहीं रहा है । शादी से पहले या शादी के बाद धर्मान्तरण का मामला ज्यादा विवाद में है । खासकर उस समय जब कोई हिंदू लड़की स्वेच्छा से या जबरन धर्म बदलकर किसी मुस्लिम लड़के से शादी कर ले । उत्तर प्रदेश में धर्मान्तरण रोक अध्यादेश, २०२० लागू होने के बाद ऐसे कई मामले इलाहाबाद हाईकोर्ट के पास पहुंचे । क्योंकि उस अध्यादेश में ‘प्रभोलन’देकर या ‘जबरन’धर्मान्तरण कराकर किया गया निकाल (विवाह) गैर जमानती अपराध की श्रेणी में रखा गया है ।
हरियाणा विधान सभा ने मार्च, २०२२ में ही धर्मान्तरण रोक बिल पास किया । कांग्रेस ने इसे ‘असंवैधानिक’बताकर यह कहकर विरोध किया कि मजहब के आधार पर सरकार समाज को बांटने की कोशिश कर रही है । आठ महीने के बाद 19 दिसंबर को इस कानून की अधिसूचना जारी हुई । इस कानून में शादी के लिए धर्मान्तरण या धर्म बदलने के लिए शादी, समझाकर, लालच देकर जबरन या बहला-फुसलाकर धर्म बदलने पर कार्रवाई का प्रावधान है ।
10 दिसंबर, २०२२ को लंदन से एक पाकिस्तानी मुल्ला/पीर द्वारा हिंदू समेत अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की लड़कियों का जबरन धर्मान्तरण कराकर मुस्लिम युवकों से निकाह कराने के आरोप में गिरफ्तार करने की सूचना मिली । सिंध निवासी भरचुंडी शरीफ दरगाह का यह पीर मियां अब्दुल एक काफी समय से इस मजहबी धंधे में जुटा था ।
विगत दिनों धर्मान्तरण और इससे उपजे राजनीतिक विवाद के कई मामले उजागर हुए । उनमें सबसे ज्यादा चर्चित रहा अक्टूबर, २०२२ में दशहरा के समय दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार में सामाजिक कल्याण मंत्री राजेन्द्र गौतम द्वारा सामूहिक धर्मान्तरण । करोलबाग में एक कार्यक्रम में मंत्री गौतम के धर्मान्तरण कराने को लेर भारी बवाल मचा । राजेन्द्र गौतम के खिलाफ हजारों लोगों की मौजूदगी में हिंदूओं के बौद्ध धर्म अपनाने का मामला दर्ज कराया गया । उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा ।
महाराष्ट्र में शिव सेना नीत गठजोड़ सरकार ने श्रद्दा वाल्कर मामले में २० दिसंबर को कहा कि दूसरे धर्म के जाल में फंसकर शादी करनेवाली जुल्म की शिकार हैं । शिव सेना मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस ने ‘लव जेहाद’को भी उसी श्रेणी में रखा । श्रद्दा के लिव-इन पार्टनर आफताब पूनावाला ने दिल्ली में उसकी टुकड़े-टुकड़े करके जान ली ।
आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसावाले ने प्रयागराज में 19-10-2022 को एक संवाददाता सम्मलेन में कहा कि आबादी का संतुलन बिगड़ने का कारण धर्मान्तरण और बांग्लादेश से होनेवाली घुसपैठ है । उन्होंने कहा कि इस वजह से कई जगह हिंदुओं की आबादी कम हो गयी है ।
२०२१ में उत्तर प्रदेश के अलावे अन्य राज्यों से भी धर्मान्तरण विवाद का मामला सामने आया । कश्मीर में एक सिख लड़की मनमीत कौर का एक मुस्लिम युवक से शादी करने का मामला इतना तूल पकड़ा कि सिख नेताओं ने श्रीनगर से लेकर दिल्ली स्थित जम्मू व कश्मीर हाउस तक प्रदर्शन किया । शिरोमणि अकाली दल का आरोप था कि पहले मनमीत कौर को ‘जबरन’मुस्लिम बनाया गया और फिर गुरुद्वारा बांग्लासाहिब में शादी करा दी गयी । Archive quality note: This text is readable and verified for publication, but minor Unicode or source-quality imperfections may remain.
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