ईडी प्रमूख का कार्यकाल बढ़ाने पर फिर विवाद
- शशिधर खान
ईडी (ED - एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट प्रवर्तन निदेशालय) प्रमख एस॰ के॰ मिश्रा को तीसरी बार सेवा विस्तार देने के केंद्र सरकार के फैसले पर नया विवाद पैदा हो गया है । यह ऐसे समय में सुप्रीम कोर्ट से निकला है, जब ईडी के कार्यकाल से राजनीतिक विवाद सुर्खियों में है । विदित हो कि ईडी निदेशक का कार्यकाल पांच वर्ष करने के अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है । उसके बावजूद एस॰ के॰ मिश्रा का तीसरी बार कार्यकाल इसी हफ्ते बढ़ाया गया है । अगले साल वे इस पद पर पांच साल पूरे करे लेंगे और 14/11/2021 को जारी केंद्र सरकार के अध्यादेश की तामीली के रूप में सेवा विस्तार पानेवाले पहले अधिकारी बने थे ।
सीवीसी (CVC) - केंद्र सतर्कता आयोग एक्ट में दो अध्यादेशों द्वारा संशोधन करके केंद्र सरकार ने १४ नवंबर, २०२१ को ईडी निदेशक और सीबीआई निदेशक के लिए पांच साल सेवा विस्तार का प्रावधान कर दिया । उसके साथ ही इन दोनों प्रमुखों का सीवीसी एक्ट के अंतर्गत निर्धारित 2 साल का कार्यकाल बढ़कर ५ साल का हो गया ।
सीवीसी एक्ट, 2003 ईडी डायरेक्टर की नियुक्ति और कार्यकाल तथा डीएसपीई (DSPE- दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टैब्लिशमेंट एक्ट), 1946 को शासित करता है, जिसके तहत सीबीआई डायरेक्टर की नियुक्ति और कार्यकाल तय होता है ।
नवंबर, २०२१ में केंद्र सरकार ने उस वक्त संशोधन अध्यादेश जारी किया, जब ईडी डायरेक्टर संजय कुमार मिश्रा की सेवा समाप्त होने में मात्र तीन दिन शेष रह गए थे ।
२०२० में केंद्र ने मिश्रा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें 2 साल का सेवा विस्तार दिया था । २०२१ में जब अध्यादेश जारी करके केंद्र सरकार ने एस॰ के॰ मिश्रा का कार्यकाल बढ़ाया, तो मामला सुप्रीम कोर्ट के पास गया । इस अध्यादेश की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी । शीर्ष कोर्ट ने एस॰ के॰ मिश्रा का सेवा विस्तार रद्द तो नहीं किया, मगर केंद्र सरकार से कहा कि 17 नवंबर (2021) से आगे ईडी निदेशक को और सेवा विस्तार नहीं दिया जाए । 17 नवंबर की तारीख आने से तीन दिन पहले १४ नवंबर को ही केंद्र ने अध्यादेश लाकर एस॰ के॰ मिश्रा के सेवा विस्तार का इंतजाम लगा दिया । राष्ट्रपति ने 18 नवंबर को अध्यादेश लागू करके मिश्रा का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया ।
अभी 17 नवंबर, २०२२ को केंद्र सरकार ने एस॰ के॰ मिश्रा को 1 साल का सेवा विस्तार दिया और इस मामले की सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट पीठ के 2 जजों में से एक ने खुद को इस सुनवाई से 18 नवंबर को अलग कर लिया । केंद्र सरकार के आदेश के तुरंत बाद याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष कोर्ट के पास गुहार लगायी कि यह मामला जल्द सुनवाई के लिए लिस्टिंग (सूचीबद्ध) की जाए, क्योंकि सरकार ने फिर से संजय कुमार मिश्रा का कार्यकाल बढ़ा दिया । सुनवाई कर रही 2 जजों की सुप्रीम पीठ में से एक जस्टिस एस॰ के॰ कॉल ने अगले ही दिन 18/11/2022 को खुद को अलग करते हुए कहा - यह मामला मैं नहीं ले सकता, अब इसकी सुनवाई वो पीठ करेगी, जिसका हिस्सा वे नहीं हैं ।
जस्टिस एस॰ के॰ कॉल के सुनवाई से अलग होने के बाद पीठ ने निर्देश दिया कि यह मामला अगले आवश्यक आदेशों के लिए चीफ जस्टिस के सामने रखा जाएगा ।
सीवीसी एक्ट में अध्यादेश के जरिए ईडी डायरेक्टर का कार्यकाल पांच साल तक करने की शक्ति अपने हाथ में लेने के केंद्र के फैसले को चुनौती देनेवाली याचिकाएं उसी समय सुप्रीम कोर्ट में दायर की गयी ।
एस॰ के॰ मिश्रा 19/11/2018 को 2 साल के लिए ईडी डायरेक्टर नियुक्त किए गए, जो सीवीसी एक्ट में प्रावधान है । 13/11/2020 को कार्यकाल एक साल के लिए और फिर नवंबर, २०२१ में दोबारा एस॰ के॰ मिश्रा को एक साल का सेवा बिस्तार दिया गया ।
इसके खिलाफ गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) कॉमन कॉज की ओर से दायर याचिका को सितंबर, २०२१ में खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एस॰ के॰ मिश्रा को सेवा बिस्तार देने के सरकार के फैसले में हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया ।
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार सीवीसी एक्ट, 2003 सिर्फ इतना कहता है कि ऐसे अधिकारी का कार्यकाल 2 साल से कम का नहीं होगा । इसका यह मतलब नहीं निकाला जा सकता है कि 2 साल से ज्यादा का नहीं हो सकता । साथ-साथ शीर्ष कोर्ट ने यह भी कहा कि ‘हमने संघ सरकार के अधिकार को सही ठहराया है, लेकिन हमें यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि जो अधिकारी अपने कार्यकाल की उम्र सीमा पार कर चुके हैं, उनका कार्यकाल अपवाद स्वरूप या विरले ही बढ़ाया जाना चाहिए । सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि सुनवाई पीठ का मिश्रा के सेवा बिस्तार में हस्तक्षेप का इरादा नहीं है, क्योंकि नवंबर, २०२१ में ही एस॰ के॰ मिश्रा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है ।’लेकिन उस तारीख के बाद उन्हें सेवा बिस्तार नहीं दिया जाएगा ।
उसके बावजूद सरकार ने ईडी प्रमुख का कार्यकाल फिर से एक साल के लिए बढ़ा दिया, ताकि पूरा कर लें ।
अब इसकी सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस वाई॰ वी॰ चन्द्रचूड़ नयी पीठ गठित करेंगे । फिर जब सुनवाई शुरू होगी तब पता चलेगा कि शीर्ष कोर्ट की अवहेलना पर जज क्या रूख अपनाते हैं ।
एस॰ के॰ मिश्रा को सेवा बिस्तार देने का आदेश जारी होने के दिन 17 नवंबर को ईडी ने पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस के बरिष्ठ नेता अनुब्रत मंडल को मवेशी तस्करी के मामले में गिरफ्तार कर लिया । ईडी अधिकारियों के अनुसार आसनसोल में लंबी पूछताछ के बाद अनुब्रत मंडल को गिरफ्तार करके वहीं उसी जगह रखा गया । उसके पहले मंडल को अगस्त में सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) ने पकड़ा और वे न्यायिक हिरासत में थे । ईडी ने अनुब्रत मंडल को मनी लाउंडरिंग वाले पहलू की जांच कर रही है । दोनों मामले मवेशी तस्करी के हैं । ईडी प्रमूख का कार्यकाल बढ़ाने पर फिर विवाद
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