आदिवासी वोट का पड़ेगा असर असम चुनाव पर

- शशिधर खान

	




हेमंत सोरेन अपनी पत्नी विधायक कल्पना सोरेन समेत पार्टी के स्टार प्रचारकों के साथ असम में कैंप कर रहे हैं । इन नेताओं का उन 35-40 विधान सभा सीटों पर धुंआधार प्रचार अभियान जारी है, जहां आदिवासी और चाय बागान मजदूरों का वोट निर्णायक होता है । 





हिमंता बिस्वा सरमा दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री बनने की तैयारी में जुटे हैं । 2016 में भाजपा को पहली बार कांग्रेस को सत्ता से हटाने में कामयाबी मिली । कांग्रेसी मुख्यमंत्री तरूण गोगोई का लगातार तीन बार का कार्यकाल समाप्त हुआ और सर्वानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने । २०२१ में भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने सोनोवाल को केंद्र में ले लिया और हिमंता बिस्वा सरमा को असम की कमान सौंपी गयी । 

तरूण गोगोई के पुत्र और असम कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई २०१४ से लोक सभा सदस्य हैं । असम में सत्ता परिवर्तन की उम्मीद में पहली बार विधान सभा चुनाव लड़ रहे हैं । 



असम में एक ही चरण में 09 अप्रील को वोट पड़ेंगे, प्रचार का समय कम है । मुकाबले के तीनों दलों ने एड़ी-चोटी लगा रखी है । 












ममता बनर्जी ने 25 मार्च को जलपाईगुड़ी में चुनावी जनसभा की । पूर्वी बंगाल की इन आदिवासी-गोरखा आबादी के बीच २०१९ से भाजपा ने अपना मजबूत आधार बनाया है । 

ममता बनर्जी असम के भी आदिवासी समेत बंगला भाषियों का नेता खुद को मानती हैं । असम के आदिवासी और चायबागान श्रमिक असमिया से ज्यादा बंगला बोलते हैं । दीदी वहां चुनावी जोर-आजमाईश कर चुकी हैं ।







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