भारत-श्रीलंका रिश्ते में तमिल फैक्टर अहम
- शशिधर खान
श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे भारत से रिश्ते मजबूत करने दिल्ली आए, चले गए । लेकिन भारत श्रीलंका द्विपक्षीय सम्बन्ध की नजदीकी में व्यापक तमिल फैक्टर के समाचार श्रीलंका से आ रहे हैं । पड़ोसी श्रीलंका से भारत के रिश्ते का सबसे अहम तमिल मुद्दा है । दोनों देशों के राजनयिकों के हर कोलंबो-दिल्ली दौरे में मुख्य चर्चा का विषय तमिल मामला होता है । राष्ट्राध्यक्षों का हाथ मिलाकर वार्ता करने और खुजलाते हुए समाप्त करने का सिलसिला कई दशकों से तमिल फैक्टर के इर्द-गिर्द चक्कर लगा रहा है ।
श्रीलंकाई राष्ट्रपति विक्रमसिंघे २१ जुलाई को 2 दिनों के दौरे पर भारत पहुंचे । उसके पहले उन्होंने तमिल नेशनल एलायंस (टीएनए) नेताओं से मुलाकात की । राष्ट्रपति ने तमिल नेताओं को ऐसी प्रांतीय स्वायत्तता देने का प्रस्ताव दिया, जिसमें पुलिस का अधिकार नहीं होगा । श्रीलंका के राष्ट्रपति ने तमिल पार्टियों के संयुक्त मंच टीएनए नेताओं के सामने 13वां संशोधन लागू करने का प्रस्ताव रखा और उसमें यह शर्त लगा दी की पुलिस को छोड़ अन्य अधिकार मिलेंगे । श्रीलंका की तमिल आबादी वाले उत्तरी प्रांत जाफना से संसद सदस्य एम॰ ए॰ सुमंतिरन ने कहा कि राष्ट्रपति का यह प्रस्ताव 13वां संशोधन के अनुसार तमिलों को अधिकार देने में राजनीतिक इच्छा का अभाव दर्शाता है । टीएनए नेताओं ने राष्ट्रपति के प्रस्ताव को ‘हवाई वायदा’कहकर ठुकरा दिया । टीएनए के प्रवक्ता सुमंतिरन ने कहा कि रानिल विक्रमसिंघे ने ही बैठक बुलायी थी, जिसमें उन्होंने पहले वाला छलावा प्रस्ताव दुहराया ।
श्रीलंकाई राष्ट्रपति के प्रतिनिधिमंडल में 2 (दो) तमिल मंत्री - डगलस देवानंदा और जीवन थोंडमन भी शामिल थे । दोनों मंत्रियों ने दिल्ली में तमिलनाडु से आए सत्तारूढ़ डीएमके सरकार की ओर से भेजे गए प्रतिनिधियों से विमर्श किया ।
तमिल फैक्टर का तार एक साथ तमिलनाडु की श्रीलंका से लगी समुद्री सीमा में मछुआरों की समस्या और श्रीलंका में भारतीय मूल के तमिलों के प्रति तमिलनाडु की भावना से जुड़ा है । भारत की भी श्रीलंकाई तमिलों के प्रति हमदर्दी का कारण भी उसका तमिल बहुल आबादी वाला तमिलनाडु राज्य है । केंद्र में या तमिलनाडु में किसी भी गठजोड़ की सरकार क्यों न हो, अपने श्रीलंकाई बिरादर के साथ जुड़े तमिलनाडु के जजबातों से भारत सरकार ताल्लुख रखती है ।
श्रीलंकाई तमिलों की प्रांतीय स्वायत्तता से सम्बन्धित 13 संविधान लगभग 30 साल पुराना है, जो 1987 के भारत-श्रीलंका समझौते का परिणाम है । कच्छाथीवू तमिलनाडु का समुद्री क्षेत्र है, जो 1974 में श्रीलंका को राज्य सरकार की सहमति के बगैर दे दिया गया । इसे श्रीलंका सरकार से वापस लेने के लिए तमिलनाडु विधानसभा ने कई बार प्रस्ताव पास किया है । एम॰ के॰ स्टालिन ने प्रधानमंत्री को लिखा कि अपने परंपरागत मछली पकड़ने के क्षेत्र में घुसने पर हमारे मछुआरों को कड़ी पाबंदियों का सामना करना पड़ता है । श्रीलंका की नौसेना आए दिन हमारे मछुआरों को पकड़ लेती है और समुद्री सीमा में घुसपैठ के कई आरोपों में फंसाकर उन्हें परेशान करती है । इसके कारण तमिलनाडु के मछुआरे अपने अधिकारों से वंचित है और उनकी जीविका पर भी आफत है । तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से श्रीलंका में 13वें संविधान संशोधन को पूरी तरह लागू करके प्रांतीय चुनाव कराने के लिए श्रीलंका के राष्ट्रपति से कहने का दूसरा आग्रह किया ।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी द्रमुक के संसद सदस्यों की श्रीलंका के राष्ट्रपति से तो भेंट नहीं हो पायी । मगर राष्ट्रपति के प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आए उनके जल आपूर्ति और एस्टेट इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास मंत्री जीवन थोंडमन मुख्यमंत्री एम॰ के॰ स्टालिन से मिले । उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री को अपनी तमिल भावनाओं से अवगत कराया और यह भी कहा कि श्रीलंका के सिंहली समुदाय के लोग 13वां संविधान संशोधन को किस रूप में देखते हैं ।
75 वर्षीय विक्रमसिंघे भारत-श्रीलंका रिश्ते की 75वीं वर्षगांठ पर सम्बन्ध को और मजबूत करने आए थे । दबंग सिंहली बहुल आबादी वाले श्रीलंका में अल्पसंख्यक तमिलों को समानता का अधिकार प्राप्त नहीं है । विक्रमसिंघे स्वयं भी सिंहली समुदाय के हैं, लेकिन इनका तमिलों के प्रति नरम रवैया है । श्रीलंका की राजनीतिक हालत भी आर्थिक की तरह इतनी डावांडोल है कि राष्ट्रपति चाहकर भी तमिलों के प्रति दोयक दर्जे का नागरिक समझने की मानसिकता को बदल नहीं सकते । भारत-श्रीलंका रिश्ते के 75 वर्षों का इतिहास मुख्य रूप से तमिलों की अपने वाजिब हक के लिए आवाज उठाने की लड़ाई से रंगा है । इसमें इतना घिच-पिच और उथल-पुथल है, जो तमिलों की प्रांतीय स्वायत्तता मांग को नीचे दबाए रखता है । तमिल असंतोष की उपज है, ‘लिट्टे’(लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) जिसने तीन दशक तक श्रीलंका की सिंहली प्रभुत्व समुदाय वाली सरकार से खूनी लड़ाई लड़ी ।
जिस 1987 भारत-श्रीलंका समझौते को 13वें संविधान संशोधन से जोड़ा जा रहा है, उसे सिंहली लोग भारत का थोपा हुआ कहते हैं । श्रीलंका के मंत्री थोंडमन ने यह बात कही । 1987 में यह समझौता प्रधानमंत्री राजीव गांधी और श्रीलंका के राष्ट्रपति जे॰ आर॰ जयवर्द्धन के बीच हुआ । भारत सरकार ने लिट्टे सफाया में श्रीलंका सरकार की मदद के लिए अपनी सेना भेजी । 1991 में तमिलनाडु दौरे के क्रम में प्रधानमंत्री राजीव गांधी की आत्मघाती बम बिस्फोट में हत्या के पीछे लिट्टे का कथित साजिश थी । 2009 में श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षा के लिट्टे सफाया अभियान में भारत सरकार ने हथियार दिए । यह तमिलों की कभी न भरनेवाले घावों की कहानी है । भारत में लिट्टे प्रतिबंधित है और तमिलनाडु के लोग लिट्टे के दीवाने हैं । एम॰ के॰ स्टालिन के पिता पूर्व मुख्यमंत्री एम॰ करूणानिधि पर भी शक की सुई राजीव गांधी हत्याकांड की जांच करनेवाले जैन आयोग ने दिखाया था ।
अभी रानिल विक्रमसिंघे ने भारत से लौटकर सभी दलों से भी विमर्श किया ।
तमिल समस्या के सामधान पर सहयोग मांग जाने के जवाब में एक सिंहली सांसद ने कहा - ‘यह हम तय करेंगे कि 13वां संशोधन लागू हो या न हो, राष्ट्रपति नहीं । अगर राष्ट्रपति को लागू करना है तो इस पर नया जनादेश लें ।’ ये सांसद महिंदानंदा अलुथगामेज श्रीलंका पीपुल्स पार्टी (एसएलपीपी) के हैं, जिसका संसद में बहुमत है । रानिल विक्रमसिंघे को संसद के वोट से चुना गया, जब राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षा को खस्ता आर्थिक हालत से भड़के जनआक्रोश के कारण गत वर्ष गद्दी छोड़नी पड़ी । उस समय से पूरी दुनिया में अनुदान के लिए हाथ फैलाए श्रीलंका को सबसे पहले भारत ने सहायता दी । लेकिन श्रीलंका की नजदीकी भारत से ज्यादा चीन से है । गत सप्ताह रानिल विक्रमसिंघे जब सर्वदलीय बैठक कर रहे थे, उस समय तमिल आबादी वाले उत्तर-पूर्वी इलाकों में लोग तालाबंदी करके मातम मना रहे थे । 2009 के ईलम युद्ध में इस इलाके में बड़े पैमाने पर तमिलों को दफनाया गय और उनके परिवारजनों का कुछ अता-पता नहीं चला । दुनियाभर में श्रीलंका की निंदा हुई । भारत-श्रीलंका रिश्ते में तमिल फैक्टर अहम
Srilanka Tamil