भारत से ज्यादा चीन के करीब हैं पड़ोसी देश

- शशिधर खान

	



पड़ोसी देशों में चीन एकमात्र इतना शक्तिशाली है जो भारत के लिए चुनौती है । पाकिस्तान हमेशा से चीन के निकट रहा है और भविष्य में भी रहेगा । लेकिन नेपाल, बांग्लादेश और समुद्री पड़ोसी श्रीलंका भी भारत के बजाए चीन को अपना ज्यादा ‘हितैषी’मानते हैं । 



भारत एक सीमा से ज्यादा चीन की परवाह नहीं करता । चीन इस बात को समझता है । 

चीन के वाणिज्य और व्यापार मंत्रालय ने 21.04.2025 को भारत समेत सभी देशों को अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ चेताया कि अमेरिका के साथ कोई व्यापारिक समझौता न करें । उसी दिन अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे॰ डी॰ वेन्स अपने परिवार के साथ भारत से व्यापार समझौते पर वार्ता करने दिल्ली में थे । 12 वर्षों में भारत आनेवाले पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति हैं जे॰ डी॰ वेन्स । इसके पहले जो बाइडन २०१३ में दिल्ली आए थे । 





एक तरफ तो भारत-चीन कूटनीतिक रिश्ते की 75वीं बर्षगांठ का ‘खुशनुमा’माहौल है और दूसरी तरफ पड़ोसी देश अपने व्यापारिक तथा कूटनीतिक सरोकार में चीन को ज्यादा तबज्जो देकर भारत के अंदर बाहर माहौल बिगाड़ रहे हैं ।



भारत-पाक कूटनीतिक संपर्क आवाजाही खत्म हो गयी । 22.04.2025 की इस जघन्य घटना से पहले पाक सेना प्रमुख जनरल मुनीर ने कश्मीर को पाकिस्तान की ‘नस’बताया और ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कान्फ्रेंस (ओआईसी) ने इसका समर्थन किया । पाकिस्तान और सऊदी अरब दोनों इस संगठन के सदस्य हैं । भारत ने पाकिस्तान और ओआईसी दोनों को करारा जवाब दिया । उस समय भारत स्थित चीनी राजदूत शू फेइहोंग भारत के साथ व्यापारिक सहयोग बढ़ाने की बात कह रहे थे और यहां लोग इस बात से खुश थे कि २०२० में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में झड़प के बाद से तनाव कम होता गया है । उसमें दोनों देशों के सैनिक मारे गये थे । 

चीन ने कभी-भी संयुक्त राष्ट्र समेत किसी अंतरराष्ट्रीय फोरम पर आतंकवाद को तरजीह देने के लिए पाकिस्तान की निंदा नहीं की । 

आतंक संचालक पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई का दस्ता फरवरी, 2025 में ढाका पहुंचा । उसी समय बांग्लादेश के विदेश सलाहकार तौहीद हुसैन ने मस्केट में भारत के विदेशमंत्री एस॰ जयशंकर से मुलाकात के दौरान दक्षिण एसियाई क्षेत्रीय सम्मेलन (SAARC- सार्क) को पुनजीर्वित करने का आग्रह किया, जो 2006 के उरी हमले के बाद से डंप है । 

सार्क की तरह बिम्स्टेक भी भारत की पहल पर बना संगठन है । खाड़ी देशों का आपस में तकनीकी और आर्थिक सहयोग बढ़ाने वाला बिम्स्टेक में पाकिस्तान नहीं है । इसमें खाड़ी देशों से सटे देश नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, म्यांमार, थाइलैंड हैं ।


सितंबर, २०२४ में श्रीलंका में अपनी कम्युनिस्ट पार्टी नेशनल पीपुल्स पावर (NPP) की भारी जीत के बाद राष्ट्रपति बने दिसानायके दिसंबर में भारत आये और फिर जनवरी, 2025 में चीन गए । चीनी जंगी जहाज के लिए श्रीलंका ने हंबनटोटा बन्दरगाह 99 वर्ष के लिए चीन को दिया हुआ है ।


नेपाल में कम्युनिस्ट गठजोड़ सरकार और म्यांमार में चीन समर्थित सैनिक तानाशाही है, जो चीन के इशारे पर भारत के पूर्वोतर उग्रवादियों को उकसाता है । भुटान इस विवाद से अलग है ।