लद्दाख परिषद चुनाव परिणाम क्या कहते हैं
- शशिधर खान
लद्दाख पहाड़ी विकास परिषद कारगिल (LAHDC-K) चुनाव परिणाम से पहला संदेश ये निकला है कि लद्दाख की किस्मत बदलनेवाली केंद्र सरकार की नीतियों को मतदाताओं ने स्वीकार नहीं किया है । भाजपा नीत केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठजोड़ (एनडीए) सरकार ने दावा किया कि लद्दाख को केंद्र शासित क्षेत्र (UT) का दर्जा देने का फैसला इनके विकास को ध्यान में रखकर 05-08-2019 को जम्मू व कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा हटाने के साथ किया गया था । भाजपा ने यह चुनाव विकास के मुद्दे पर ही लड़ा था, जिसे लद्दाख पहाड़ी के लोगों ने ठुकरा दिया । मतदाताओं ने नेशनल कान्फ्रेंस (NC) और कांग्रेस - गठजोड़ को प्रचंड बहुमत से जिताया, जिसने धारा-370 खत्म करने के केंद्र सरकार के फैसले को ही मुख्य मद्दा बनाया था । लद्दाख लोकसभा सीट पर प्रतिनिधत्व भाजपा के टिकट पर जीते जाम्यांग नामग्याल कर रहे हैं । वे भाजपा कार्यकर्ताओं को पहले से ही चेता रहे थे कि इस बार की चुनौती कठिन है, मिहनत ज्यादा करनी पड़ेगी । इसका मतलब भाजपा को पहले से ही अंदाजा था कि लद्दाख पहाड़ी हवा की राजनीतिक सरगर्मी उसके खिलाफ बह रही है ।
धारा-370 खत्म करके जम्मू व कश्मीर विशेष संवैधानिक दर्जा हटाने और इस राज्य को दो दो केंद्र शासित क्षेत्र (UT) में विभाजित किए जाने के बाद यह पहला चुनाव है । 04 अक्टूबर को चुनाव हुए और 08 अक्टूबर को परिणाम घोषित हुए । 30-सदस्यीय लद्दाख पहाड़ी विकास परिषद - कारगिल (LAHDC-K) की २६ सीटों के लिए मतदान हुए जिसमें नेशनल कान्फ्रेंस - कांग्रेस गठजोड़ ने भारी बहुमत हासिल की । नेशनल कान्फ्रेंस ने 12 और कांग्रेस ने 10 सीटें जीती । भाजपा को मात्र 2 सीटों से संतोष करना पड़ा और निर्दलीय सिर्फ दो सीट जीत पाए । २४ निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें से ज्यादातर को या तो भाजपा ने ही खड़ा किया था या उन्हें भाजपा का समर्थन था । लेकिन उन्हें भी मतदाताओं ने नकार दिया । लद्दाख से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार प्रतिकूल संभावना के मद्देनजर भाजपा ने शायद यह सोचकर ऐसी नीति अपनायी ताकि अगर ज्यादा निर्दलीय जीते तो एग्जीक्यूटिव निकाय के गठन में इनकी निर्णायक भूमिका हो । निर्दलीय उम्मीदवारों का चुनाव प्रचार अभियान भाजपा से मिलते-जुलते और नेशनल कान्फ्रेंस - कांग्रेस के खिलाफ थे । कांग्रेस ज्यादा उत्साहित थी, जिसने सबसे ज्यादा २२ उम्मीदवार खड़े किए थे । लेकिन मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और नेशनल कान्फ्रेंस के बीच था ।
भाजपा इस बात को पहले से ही समझ रही थी । इसलिए नेशनल कान्फ्रेंस को अपने रास्ते से हटाने का इंतजाम लगाने के प्रयास में यूटी प्रशासन का भी कथित इस्तेमाल भाजपा ने किया । मामला जम्मू व कश्मीर हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गया और सुप्रीम कोर्ट ने भी लद्दाख प्रशासन को फटकार और जुर्मान के साथ तल्ख टिप्पणी की - ‘प्रशासन से यह उम्मीद नहीं की जाती कि चुनाव प्रक्रिया का संचालन किसी पूर्वाग्रह या किसी के प्रभाव में आकर किया जाए ।’
यूटी प्रशासन की योजना कामयाब नहीं होने देने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पहले से घोषित चुनाव कार्यक्रम रद्द करके नेशनल कान्फ्रेंस के पक्ष में फैसला सुनाया । सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लद्दाख प्रशासन को मतदान की तारीख दोबारा घोषित करनी पड़ी । हुआ यों कि यू टी प्रशासन ने नेशनल कान्फ्रेंस (एन सी) का चुनाव चिन्ह ‘हल’इस आधार पर रद्द कर दिया कि चुनाव आयोग ने लद्दाख की यू टी के लिए एन सी को राज्य पार्टी का दर्जा देने की अधिसूचना जारी नहीं की है और उसके बाद लद्दाख परिषद चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया । इसमें रोचक पहलू ये है कि यू टी प्रशासन ने 05-08-2023 को ही LAHDC चुनाव की अधिसूचना जारी की और 10 सितंबर को मतदान का एलान कर दिया । नेशनल कान्फ्रेंस की अर्जी पर यू टी प्रशासन ने कोई विचार नहीं किया ।
नेशनल कान्फ्रेंस ने जम्मू व कश्मीर हाईकोर्ट में गुहार लगायी । हाईकोर्ट के एकल जज पीठ ने अपने अंतरिम आदेश में जम्मू व कश्मीर नेशनल कान्फ्रेंस का ‘हल’चुनाव चिन्ह बहाल करने कहा । लद्दाख प्रशासन ने उसे खंड पीठ के आगे चुनौती दी, जहां जजों ने एकल पीठ के आदेश को सही ठहराया । उसके खिलाफ भी यू टी प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की । सुप्रीम कोर्ट जज विक्रम नाथ और एहसानुद्दीन अमानुल्ला की पीठ ने ६ सितंबर को अपील खारिज करते हुए जे एंड के हाईकोर्ट खंडपीठ के फैसले को सही ठहराया और यू टी प्रशासन पर एक लाख रूपये का जुर्माना भी लगाया । NC ने दलील दी कि जे एंड के नेशनल कान्फ्रेंस को पहले से ही चुनाव आयोग से राज्य पार्टी के रूप में मान्यता प्राप्त है और चुनाव चिन्ह ‘हल’के इस्तेमाल का उसे पूरा हक है । यू टी प्रशासन की दलीलों को ठुकराने के बाद सुप्रीम कोर्ट जजों ने ६ सितंबर को चुनाव की नयी तारीख घोषित करने के आदेश के साथ जो टिप्पणी की वो गौर करने लायक है । लद्दाख प्रशासन ने दलील दी की जे एंड के नेशनल कान्फ्रेंस को कोई राहत नहीं दी जा सकती, क्योंकि चुनाव प्रक्रिया अंतिम चरण में है । सुप्रीम कोर्ट ने एक हफ्ते के अंदर नयी तारीख घोषित करने का आदेश देते हुए कहा - ‘यह दलील ठुकरायी जाती है, क्योंकि खुली आंखों से NC की अर्जी पर विचार नहीं करने और हाईकोर्ट के एकल जज पीठ खंड पीठ जजों के फैसले को लागू नहीं करके यह रास्ता चुना गया है, जबकि जजों ने बिल्कुल समय का ख्याल करके आदेश सुनाया था ।’
इसका लाभ नेशनल कान्फ्रेंस को मिला और भाजपा को २०२० में जो वोट मिले थे वो भी NC - कांग्रेस गठजोड़ के खाते में गया । २०१८ में भाजपा को मात्र एक सीट मिल पायी थी, लेकिन २०१९ लोकसभा चुनाव में भाजपा ने लद्दाख सीट जीती ।
अभी के LAHDC-K चुनाव परिणाम का असर आनेवाले लोकसभा चुनाव पर पड़ेगा । नेशनल कान्फ्रेंस उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने जीत के बाद कहा - ‘यह जनमतसंग्रह है, जो बताता है कि असंवैधानिक तरीके से जे एंड के का विशेष राज्य दर्जा हटाने और विभाजित करके जनप्रतिनिधियों की जगह राज्यपाल शासन चलाने की राजनीति लोगों ने ठुकरा दी ।’ कांग्रेस ने शुरू से ही धारा-370 हटाने के फैसले पर कभी अपना रूख स्पष्ट नहीं किया । लद्दाख परिषद चुनाव परिणाम में जीत का श्रेय कांग्रेस के जयराम रमेश अपने नेता राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के क्रम में अगस्त में और सितम्बर में भी वाईक से लद्दाख में घूम-घूमकर युवकों से हिलने-मिलने को देते हैं ।
भाजपा के लिए २०२४ में लद्दाख सीट जीतना मुश्किल हो सकता है । क्योंकि LAHDC की दो सीटें भी भाजपा उम्मीदवारों ने बहुत थोड़े अंतर से जीती हैं । भाजपा नेतृत्व ने इस चुनाव में प्रचार अभियान का जिम्मा दो वरिष्ठ नेताओं - मीनाक्षी लेखी और तरूण युग को दिया था । दोनों ने मिहनत में कोई कसर नहीं छोड़ी । लेकिन नेशनल कान्फ्रेंस के नारे - ‘हल ही हल है’के आगे भाजपा का विकास नारा दब गया ।
नेशनल कान्फ्रेंस के नेतृत्व में धारा-370 और जे एंड के का विशेष राज्य दर्जा वापसी की लड़ाई के लिए बने कश्मीरी पार्टियों के गुपकार गठजोड़ ने इस चुनाव में राज्यपाल शासन खत्म करके लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाली पर बल दिया । गुपकार गठजोड़ को शानदार जीत का पूरा भरोसा था । इसलिए मतदान से एक दिन पहले ही बैठक करके परिणाम की तारीख को ध्यान में रखकर जम्मू में 10 अक्टूबर को शांतिपूर्ण विरोध की योजना बनायी गयी ।
जे एंड के में ‘संविधान बिलंबित’के विरोध में आयोजित इस विरोध की तैयारी 08 अक्टूबर को परिणाम घोषित होने के बाद जश्न में बदल गयी । हिंदू बहुल आबादी वाले जम्मू में भाजपा का वोट ज्यादा है । लेह और कारगिल दो जिलों को मिलाकर बने लद्दाख क्षेत्र के मतदाताओं की नस समझने में भाजपा ने स्थानीय मतदाताओं की भावना से ज्यादा अपने एजेंडे को महत्व दिया, जैसा कि लोगों का कहना है । शिया मुस्लिम बहुल आबादी वाले कारगिल में 65,878 मतदाता हैं । 1999 कारगिल युद्ध में जो स्थानीय लोगों की आबादी तहस-नहस हुई, उन्हें बसाने की कोई पुख्ता योजना नहीं बनायी गयी । वहां के लोग धारा-370 हटाकर कश्मीर से कारगिल को अलग करने से खफा है ।
अगस्त, २०२२ में लद्दाख दौरे के क्रम में मेरी स्थानीय लोगों से बातचीत हुई । लद्दाख मुस्लिम एसोसिएसन (एलएमए) में फूट भाजपा की नीतियों के कारण पड़ी । आज शिया और सुन्नी का अलग-अलग गुट है । शिया गुट के एलएमए प्रमुख अब्दुल कÕयूम और सुन्नी गुट प्रमुख अशरफ अली दोनों की बातचीत से यही पता चला । बौद्ध बहुल आबादी वाले लेह में भी भाजपा के प्रति असंतोष पहले से था । बौद्धों के संगठन लद्दाख बौद्ध एसोसिएसन (एलबीए) अपने एम पी से नाराज है ।
वर्तमान एम पी जाम्यांग नामग्याल के गांव माथो में मिले । उनके विरोधी थुप्स्तान छेवांग, जो अभी लद्दाख बौद्ध एसोसिएसन (एलबीए) के अध्यक्ष हैं । उन्होंने कहा - ‘हमारा एसोसिएसन जो चाहता है, वही होने देंगे ।’एलबीए को इस बात से नाराजगी है कि केंद्र सरकार ने लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की 6ठी अनुसूची में शामिल करने की उनकी मांग पर विचार तक नहीं किया और उनके एम पी ने एक बार भी यह आवाज नहीं उठायी, न ही प्रतिनिधिमंडल का साथ दिया ।
धारा-370 हटाने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देनेवाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है और सबको फैसला आने का इंतजार है । इसलिए हर कोई इस पर कुछ बोलने से परहेज कर रहे हैं । सब जे एंड के विधान सभा चुनाव पर जोर दे रहे हैं, जिसमें लद्दाख का भी प्रतिनिधित्व शामिल है । Archive quality note: This text is readable and verified for publication, but minor Unicode or source-quality imperfections may remain.
विषय
Jammu and Kashmir Ladakh
Related Articles
स्रोत और अभिलेखीय संदर्भ
यह लेख स्वीकृत प्रकाशन पैकेज से प्रस्तुत किया गया है। मूल स्रोत अभिलेखीय प्रणाली में सुरक्षित है।
प्रकाशन संदर्भ: Sanmarg
स्रोत प्रकार: अभिलेखीय सत्यापित स्रोत
Reference details
Canonical ID: can_b408e9ac
Source reference: Source: ladakh 10-10-2023.docx
पाठ स्रोत एवं रूपांतरण विवरण
Preprocessing header lines were removed from the public article body.
[preprocessing marker removed]