जनादेश, आतंकवाद और कानून : जेल से संसद तक

- शशिधर खान

	



आतंकी और गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में जेल में बंद दो अभियुक्तों ने संसद सदस्यता की शपथ ली है । ये हैं, कश्मीरी नेता शेख अब्दुल राशिद उर्फ इंजीनियर राशिद और पंजाब के कथित खालिस्तान समर्थक नेता अमृतपाल सिंह । 

‘इंजीनियर राशिद’के लोकप्रिय नाम से मशहूर शेख अब्दुल राशि UAPA (यूएपीए - गैर कानूनी गतिविधियां रोक कानून) के तहत २०१९ से तिहाड़ जेल में बंद है । इन पर पाक पोषित कश्मीरी आतंकियों की फंडिंग का आरोप है । अब्दुल राशिद ने कश्मीर की बारामुला सीट पर 18वीं लोकसभा के लिए भारी मतों से जनादेश प्राप्त किया है । 

‘बारिस पंजाब दे’संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए-NSA ) के अंतर्गत फरवरी, २०२३ से असम के डिब्रूगढ़ जेल में बंद है । इन पर खालिस्तान के समर्थन में खालसा पंथ की आड़ लेकर पंजाब के युवकों को हिंसा के लिए उकसाने का आरोप है । अमृतपाल सिंह ने पंजाब की खडूर साहिब लोकसभा सीट से भारी मतों के अंतर से जीत हासिल की है । 

दोनों ही एमपी पेरोल पर जेल से बाहर आए । कड़े सुरक्षा बंदोबस्त के बीच लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने दोनों निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को सदस्यता की शपथ 05 जुलाई को  दिलायी । उसके साथ ही इंजीनियर राशिद और अमृतपाल सिंह दोनों ही लॉमेकर (संसद सदस्य) बन गए । अब इन दोनों को कानून बनाने में साझीदारी का अधिकार मिल गया । 


अब संसद का बजट सत्र २२ जुलाई से शुरू हो रहा है । सत्र में शामिल होने के लिए इंजीनियर राशिद और अमृतपाल सिंह को फिर जेल से छोड़ना होगा । जनादेश से प्राप्त अधिकार के तहत दोनों दो सदन में अपनी बात रखने से कोई कानून रोक नहीं सकता । हमारी संवैधानिक व्यवस्था के अंतर्गत जनादेश से बड़ा कोई कानून नहीं है । जनादेश प्राप्त व्यक्ति लॉमेकर (कानून बनानेवाला) कहलाता है । इसके आगे कानून, कोर्ट शिथिल पड़ जाता है । 

इंजीनियर राशिद ने दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में इसी आधार पर अंतरिम जमानत की अर्जी लगायी कि उन्हें संसद सदस्य के रूप में शपथ लेनी है । उनके खिलाफ चल रहे मामले की तहकीकात करनेवाली राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जमानत अर्जी का विरोध नहीं किया, मगर कुछ प्रतिबंध की शर्ते जोड़ दी । शर्त ये लगायी कि अब्दुल राशिद मीडिया से कोई बात न करें और शपथ ग्रहण से लेकर अपने अन्य कार्यकलाप एक ही दिन के अंदर समाप्त कर दें । पटियाला हाउस कोर्ट ने अतिरिक्त सेसन्स जज चंदरजीत सिंह ने अब्दुल राशिद की अंतरिम जमानत की अर्जी पर सुनवाई 01 जुलाई के लिए स्थगित कर दी और एनआईए को अपना जवाब दाखिल करने कहा । एनआईए का सशर्त जवाब आने के बाद कोर्ट ने अब्दुल राशि को 05 जुलाई को संसद सदस्यता की शपथ लेने के लिए अंतरिम जमानत का आदेश दिया । 

अमृतपाल सिंह को भी लोकसभा सदस्यता ग्रहण करने के लिए सशर्त पेरोल पर जेल से बाहर आने दिया गया । इन्होंने जेल में रहते हुए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पर्चा भरा और तकरीबन 2 लाख वोटों से खडूर साहिब लोकसभा सीट जीती । अमृतपाल सिंह भिंडरांवाले नंबर-2 के रूप में लोकप्रिय हैं । इनकी जीत ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार, कांग्रेस, भाजपा, शिरोमणि अकाली दल के सारे राजनीतिक पंडितों को सकते में डाल दिया । अमृतपाल सिंह को हथियारों से लैस अपने समर्थकों के साथ कानून हाथ में लेने के प्रयास में गिरफ्तार  किया गया । 

पाठक याद कर लें कि प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को किन परिस्थितियों में पंजाब में आतंकी उफान और अलग खालिस्तान मांग से उपजी हिंसा पर काबू पाने के लिए ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाना पड़ा । आतंकी सरगना जरनैल सिंह भिंडरांवाले उस समय सुरक्षा बलों के हाथों मारा गया, जब फौज को अमृतसर स्वर्ण मंदिर के अंदर घुसकर आतंकियों से निबटना पड़ा । 

अमृतपाल सिंह ने 23.02.2023 को तलवारों और लाठियों से लैस अपने हजारों समर्थकों के साथ अजनाला थाना को घेर लिया । हमले में ६ पुलिसकर्मी घायल हो गए । अमृतपाल सिंह के एक समर्थक को हिंसा फैलाने के आरोप में पुलिस ने पकड़ा था । उसके विरोध में उसने थाना पर हमला किया । अमृतपाल सिंह का कहना है कि वो पंजाब के युवकों के बीच नशा मुक्ति अभियान चला रहा है । लेकिन अमृतपाल गुरू ग्रंथ साहिब की आड़ में खालिस्तान समर्थक धार्मिक आयोजन में शामिल है । ये पुलिस का आरोप है । 

अमृतपाल सिंह को भिंडरांवाले के गांव टोड़ से गिरफ्तार किया गया और उसने सितंबर, २०२२ में ‘दस्तर बांघी’(पगड़ी बांधो) समारोह भिंडरांवाले के गांव में ही किया था । 

चुनाव प्रचार अमृतपाल के पिता तरसेम सिंह ने तपती धूप और गर्मी में यह कहकर किया - ‘यह अब मेरा पुत्तर नहीं, अब पंजाब का पंथ का पुत्तर है ।’मतदाताओं ने अमृतपाल सिंह को रिकार्ड वोटों से जिताकर संसद भेजा है, इसके आगे कोई कानून नहीं काम कर सकता । मगर यह जनादेश चिंता का संदेश है कि पंजाबी युवकों में अलगाववादी उफान का आखिर कारण क्या है । 

कश्मीर में और पंजाब में 1980 के दशक में लगभग साथ-साथ आतंकवाद उपजा है । कश्मीर में आतंकवाद पर काबू और शांति तथा विकास का मार्ग प्रशस्त होने का केंद्र की वर्तमान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठजोड़ सरकार का दावा निराधार नहीं है । लेकिन लोकसभा चुनाव में कश्मीर की प्रतिष्ठित बारामुला सीट से एक निर्दलीय उम्मीदवार की 2 लाख वोटों से जीत भाजपा से ज्यादा कश्मीरी राजनीतिक दलों के नेताओं को उलझन में डाल दिया । अब्दुल राशिद शेख दो बार विधायक रह चुके हैं । पर 18वीं लोकसभा सीट से इंजीनियर राशिद की जीत इसलिए माएने रखती है, क्योंकि उन्होंने जम्मू व कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को हराया है । सीधा मुकाबले में अब्दुल राशिद ने उमर अब्दुल्ला और सज्जाद लोन को हराया । इन दोनों के संयुक्त वोट से काफी ज्यादा वोटों से मतदाताओं ने इंजीनियर राशिद को जिताया । पेशे से सिविल इंजीनियर रहे अब्दुल राशिद ने अपनी राजनीतिक गतिविधियां 2008 में शुरू की और उसी वर्ष निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विधान सभा चुनाव जीता । दूसरी बार भी निर्वाचित हुए । 2017 आतंकी फंडिंग मामले में अब्दुल राशिद यूएपीए (गैर कानूनी गतिविधियां रोक कानून) के अंतर्गत गिरफ्तार  किए गए और २०१९ से तिहाड़ जेल में बंद करके उनके मामले की जांच एनआईए कर रही है । 

राशिद के विषय में एक जानकारी उल्लेखनीय है । विधायक के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल में अब्दुल राशिद शेख ने अक्टूबर, 2015 में सरकारी गेस्ट हाउस में कथित गोमांस पार्टी का आयोजन किया । जिसके कारण विधान सभा के अंदर उन्हें थप्पड़ मारा गया । ऐसे व्यक्ति को कश्मीरी मतदाताओं ने बहुमत दिया है । इंजीनियर राशिद की जीत बताती है कि मुस्लिम बहुल मतदाता वाले कश्मीर क्षेत्र में धारा-370 हटाना या उसकी वापसी के चुनावी संघर्ष मुद्दे से कोई सरोकार नहीं है । उमर अब्दुल्ला नेशनल कान्फ़्रेंस के नेता हैं, जो पार्टी धारा-370 वापसी की लड़ाई की संयोजक है ।

२२ जुलाई से 12 अगस्त तक चलनेवाले संसद के बजट सत्र में अब्दुल राशिद और अमृतपाल के शामिल होने की व्यवस्थता कानून अनुपालन एजेंसियों कैसे करती हैं, यह तो देखना ही होगा । साथ-साथ दोनों जनप्रतिनिधियों को भी अब सोचना होगा कि मतदाताओं ने किस उम्मीद में उन्हें वोट दिया है । अमृतपाल सिंह बरगलाए युवक हैं, इसका अंदाजा तो लगता है । परिवारजनों से मुलाकात के दौरान की खबर है कि अमृतपाल की मां बलबिंदर कौर ने कहा - ‘राज्य के युवकों के लिए बोलने का यह मतलब नहीं कि मेरा पुत्तर खालिस्तान समर्थक हो गया ।’बताया जाता है कि इस बात पर अमृतपाल ने कहा - ‘खालसारण का सपना अपराध नहीं, गर्व का विषय है ।’