पेगासस जासूसी में भारत-इजरायल रिश्ता
- शशिधर खान
पेगासस जासूसी खुलासा नया नहीं है । २०२१ में संसद का मानसून सत्र इस हंगामे की भेंट चढ़ा । उसके पहले सुप्रीम कोर्ट में यह मामला जा चुका था । जुलाई, २०२१ में दुनिया भर के अखबारों में यह खबर उछली कि इजरायल के रक्षा मंत्रालय से मान्यता प्राप्त एनएसओ कंपनी के स्पाईवेयर पेगासस का इस्तेमाल भारत समेत विभिन्न देशों की सरकारें गैरकानूनी तरीके से पत्रकारों, एक्टिविस्टो (कार्यकर्ताओं), मंत्रियों और विपक्षी सदस्यों के खिलाफ जासूसी के लिए कर रही है । भारत में मीडिया ऑनलाईन ‘दि वायर’ने नाम के साथ यह उजागर किया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी, राजनीतिक रणनीति तैयार करनेवाले प्रशांत किशोर, उस समय चुनाव आयुक्त रहे अशोक लवासा और अभी सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव भाजपा के निशाने पर थे । उस वक्त अश्विनी वैष्णव मंत्री नहीं थे । निशाने वाली खुलासा सूची में 40 पत्रकारों समेत और भी कई ऐसे नाम थे, जो भाजपा की नीतियों से सहमति नहीं रखते थे ।
२०२१ में संसद के मानसून सत्र से शुरू हुए इस हंगामे ने शीतकालीन सत्र का पीछा किया और इस वर्ष भी कोई सत्र इससे अछूता नहीं बचेगा ।
02/11/2021 को ग्लासगो में कॉप-26 जलवायु शिखर बैठक के दौरान इजरायली प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट से मुलाकात तो इतनी अच्छी रही कि नफ्ताली बेनेट ने अपनी पार्टी में शामिल होने का न्योता भारत के प्रधानमंत्री को दिया ।
उसी समय अमेरिका ने पेगासस कंपनी एनएसओ को ब्लैकलिस्ट कर दिया । राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने वाणिज्य मंत्रालय को स्पष्ट निर्देश दिया कि अमेरिका के अंदर जासूसी करनेवाली इस कंपनी से कोई सौदा नहीं हो सकता ।
अक्टूबर, २०२१ के अंतिम सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस स्पाईवेयर के बचाव में सरकार की यह दलील ठुकरा दी कि यह ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’से जुड़ा मामला है, इसलिए हर बात सार्वजनिक नहीं की जा सकती ।
27/10/2021 को चीफ जस्टिस एन॰ वी॰ रमना की अध्यक्षता वाली तीन सुप्रीम कोर्ट जजों की पीठ ने साफ-साफ कह दिया कि ‘सरकार हर बार राष्ट्रीय सुरक्षा की दुहाई देकर फ्री पास नहीं ले सकती’ और मामले की विस्तृत जांच के लिए टेक्नीकल विशेषज्ञों की 3-सदस्यीय कमिटी गठित कर दी ।
इसकी बिल्कुल परवाह न करते हुए 31/10/2021 को भारत ने इजरायल के साथ रक्षा से सम्बन्धित मुद्दों पर बातचीत के दौरान एक ‘संयुक्त कार्यदल’गठित करने पर सहमति जतायी ।
अभी लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने जब पेगासस पर विशेषाधिकार नोटिस दिया तो संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सुप्रीम कोर्ट की आड़ लेकर इसे गलत करार दिया । सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने और धोखा देने का आरोप का दस्तावेज शीर्ष कोर्ट में चली सुनवाई के दौरान सरकार की दलीलों से ही मिल जाता है ।
सरकार को हंगामे का अंदाजा था, इसलिए बजट सत्र के पहले चरण में कोई विधेयक न लाने का फैसला किया गया ।
भारत की फिलस्तीनियों के अस्तित्व की लड़ाई से हमदर्दी रही, इसलिए इजरायल से रिश्ता मजबूत गैर-कांग्रेस सरकारों ने नहीं कायम किया । अंदरूनी सुरक्षा के लिए इजरायल से मदद भाजपा सरकार के समय शुरू हुई । अभी भारत एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन ईरान और इजरायल के बीच लड़ाई का माध्यम बना हुआ है । नवंबर, २०२१ में जब सुप्रीम कोर्ट में मामला था और दुनिया भर में हंगामा मचा था । उस समय भारत स्थित इजरायली राजदूत नाओर गिलोन और इरानी राजदूत डॉ अली चेगेनी फरवरी, २०२० में इजरायली दूतावास पर हुए हमले के लिए ट्वीटर पर भड़ांस निकाल रहे थे । पेगासस जासूसी में भारत-इजरायल रिश्ता
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