राष्ट्रपति पद के लिए साझा उम्मीदवारी की कवायद

                                                                                             - शशिधर खान

	


इस कवायद से पहले और इस दौरान राष्ट्रपति पद के चुनाव को लेकर विभिन्न हलकानों से निकले समाचारों से यह प्रसंग काफी रोचक हो गया है । 

तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी ने 19 विपक्षी दलों के नेताओं को 11 जून को पत्र लिखकर राष्ट्रपति पद के लिए साझा उम्मीदवार पर विचार के लिए १५ जून को दिल्ली आने का न्योता दिया । उस समय एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) नेता शरद पवार का नाम सामने नहीं आया था । बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल (यू) नेता नीतीश कुमार का नाम पहले से ही पटना में सुर्खियों में था । 

ममता बनर्जी द्वारा आहूत बैठक से दो दिन पहले भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जे॰ पी॰ नड्डा और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए विभिन्न दलों से बात करने के लिए अधिकृत किए गए । उधर नीतीश कुमार ने संवाददाताओं के इन सवालों का खंडन करते हुए स्पष्ट कह दिया - ‘मीडिया द्वारा ही ऐसी अटकलबाजी की खबर मिली है और मैं राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी दौड़ में शामिल नहीं हूं । मेरी ऐसी कोई लालसा नहीं है ।’

भारत के 16वें राष्ट्रपति चुनाव के लिए ममता बनर्जी ने संभवतः सोच-समझकर १५ जून की तारीख रखी थी । क्योंकि चुनाव आयोग के पूर्व ऐलान के अनुसार १५ जून को ही राष्ट्रपति चुनाव के लिए अधिसूचना जारी होनी तय थी । ममता बनर्जी और शरद पवार १४ जून को ही दिल्ली पहुंच गए । दीदी ने शदर पवार के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की, जबकि पवार दिल्ली पहुंचने से पहले मुंबई में ही अपनी अनिच्छा जाहिर कर चुके थे । शरद पवार ने खुद को साझा उम्मीदवार खोजने की कवायद का हिस्सा माना । बैठक से पहले ही उन्होंने मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (सीपीएम) नेता सीताराम येचुरी और भारतीय कम्यूनिष्ट पार्टी (सीपीआई) नेता डी॰ राजा से बात की । १५ जून की बैठक में भी शरद पवार राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने को तैयार नहीं हुए । 

संयोग कुछ ऐसा रहा, १४ जनू को ही सूत्रों से पता चला कि संसद के मानसून सत्र के 18 जुलाई से शुरू होने की संभावना है । हालांकि संसदीय मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने इसकी पुष्टि नहीं की थी । राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 18 जुलाई तक ही है, जिस दिन चुनाव है । अब यह देखना होगा कि अगर 18 जुलाई को मानसून सत्र शुरू हुआ तो रामनाथ कोविंद अंतिम बार संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित कर पाते हैं या नहीं । 

शरद पवार के अलावे कान्फ्रेंस नेता और जम्मू व कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला का भी नाम संभावित उम्मीदवार के लिए सामने आया । भाजपा अध्यक्ष जे॰ पी॰ नड्डा ने फारूक अब्दुल्ला और अन्य नेताओं से बात की । भाजपा आम सहमति से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार तय करना चाहती है, इसे अच्छी पहल कही जा सकती है । अगर ऐसा संभव हुआ, तो आजादी के 75वें वर्ष में सर्वसम्मति से राष्ट्रपति का चुनाव एक नए अध्याय की शुरूआत होगी । 


इस बैठक के लिए ममता बनर्जी के लिखे पत्र का कांग्रेस और वाम दलों ने स्वागत नहीं किया । लेकिन १५ जून से पहले ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नेशनल हेराल्ड से सम्बन्धित धनशोधन के मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बुलाकर पूछताछ शुरू कर दी । जब विपक्षी दलों की बैठक चल रही थी और राजनाथ सिंह उन नेताओं से बात कर रहे थे, तब भी घंटों राहुल गांधी से पूछताछ जारी थी । 

इस घटना ने कांग्रेस और वामदलों की सोच बदल दी, बैठक में दोनों दलों के नेता शामिल हुए । उसके पहले ममता बनर्जी की ‘एकतरफा’पहल से कांग्रेस-वाम सहमत नहीं थे । 

ममता बनर्जी ने भी तुरंत अपनी नीति बदल दी और उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के स्वास्थ्य के विषय में जानकारी ली । राहुल गांधी के खिलाफ ईडी कार्रवाई की निंदा की । कांग्रेस विरोध में सड़कों पर उतरी हुई थी, लेकिन सिर्फ उनके सहयोगी-सह-विपक्षी वाम दल ही इसके खिलाफ बयान दे रहे थे । आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल, तेलंगाना राष्ट्र समिति नेता चन्द्रशेखर राव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की तरह कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के साथ कोई मंच साझा करने से परहेज रखते हैं । दिल्ली के बाद पंजाब में भी सरकार बन जाने के बाद आम आदमी पार्टी भी अब विपक्ष में राष्ट्रीय संयोजक के रूप में कांग्रेस को पीछे करने की ख्वाहीश में राव और बनर्जी के साथ हैं । 


अगर आम सहमति नहीं बनती है और मुकाबले की नौबत आती है तो विपक्ष के साझा उम्मीदवार का भी जीतना असंभव है । क्योंकि भाजपा संसद में ३०० सदस्यों के साथ पूर्ण बहुमत में है और अधिकांश राज्यों में भाजपा की बहुमत से सरकार चल रही है । विपक्षी एकजुटता में दरार है । राष्ट्रपति पद के लिए एक और नाम पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी का आया है, जिसकी विपक्षी खेमे में कोई चर्चा नहीं है ।