धारा-370 खत्म किए जाने का 5वां साल

सिर्फ भाजपा का यह राजनीतिक मुद्दा



- शशिधर खान

	





लोकसभा चुनाव परिणाम की कश्मीर से मिली रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया कि कश्मीरी मतदाताओं को धारा-370 हटाए जाने से कोई लेना-देना नहीं है । मुस्लिम बहुल आबादी वाले कश्मीर क्षेत्र में वोटर टर्न आउट पिछले कई दशकों से ज्यादा हुआ, मगर धारा-370 हटाने को भुनाने का प्रयास करनेवाली भाजपा ने पहले ही कदम पीछे कर लिए । भाजपा समर्थित दलों को करारी हार मिली । धारा-370 के अंतर्गत राज्य को प्राप्त विशेष संवैधानिक दर्जा वापसी की लड़ाई के नाम पर वोट मांगनेवाले क्षेत्रीय दलों को भी मतदाताओं ने ठुकरा दिया । हिन्दू बहुल आबादी वाले जम्मू क्षेत्र की दोनों सीटें भाजपा को मिलने में धारा-370 की राजनीति का योगदान नहीं है । 

प्रधानमंत्री हर हाल में धारा-370 को चर्चा में बनाए रखना चाहते हैं । भाजपा को छोड़ किसी भी राजनीतिक दल के लिए धारा-370 कोई मुद्दा नहीं है और अन्य दलों को इस विषय पर चर्चा में कोई रूचि नहीं है । लेकिन प्रधानमंत्री अवाम से चर्चा कराने को ‘प्रतिबद्ध’हैं । 


प्रधानमंत्री ने कारगिल से यह संदेश दिया कि धारा-370 हटाए जाने का 5वां साल उत्सव के रूप में मनाया जाए । भाजपा शासित राज्य सरकारें इसकी तैयारी में जुट गयीं । २६ जुलाई को प्रधानमंत्री ने लद्दाख में सबको याद दिलाया और तीन दिन बाद जयपुर से उनके ‘मन की बात’के अनुकूल खबर आयी । राजस्थान की भाजपा सरकार ने सरकारी स्कूलों को नया एकेडमिक कैलेंडर 29 जुलाई को जारी किया, जिसमें 05 अगस्त को ‘स्वर्ण मुकुट मस्तक दिवस’के रूप में मनाने कहा गया है । राजस्थान शिक्षा विभाग की ओर से जारी इस नए डिजाईन के शैक्षणिक कैलेंडर में 28 मई को वीर सावरकर जयंती के साथ 05 अगस्त का धारा-370 खात्मा दिवस को भी जोड़ दिया गया है । इसमें तारीखों के हिसाब से और भी कई जयंती दिवस मनाने का प्रस्ताव है, जिससे कहीं-न-कहीं भाजपा के सियासी राजनीति का पोषण होता है । मगर स्कूलों को दिए गए प्रस्ताव में धारा-370 खात्मा दिवस मनाने पर सबसे ज्यदा जोर दिया गया है । भाजपा के लिए ‘ऐतिहासिक’उपलब्धि का दिन 05 अगस्त चुनावी राजनीतिक मस्तक पर ‘स्वर्ण मुकुट’की तरह है । इसलिए राजस्थान सरकार ने अपने कार्यकर्ताओं सरीखा सरकारी स्कूलों को भी यह दिन ‘स्वर्ण मुकुट मस्तक दिवस’ के रूप में मनाने कहा है । दिसंबर, २०२३ में भाजपा राजस्थान में सत्ता में लौटी है । इस प्रस्ताव पर विवाद तूल पकड़ रहा है । राजस्थान प्रदेश कांग्रेस यूनिट के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना करते हुए धारा-370 हटाए जाने की सियासी राजनीति में स्कूलों को घसीटने पर आपत्ति जतायी है । लेकिन उसके बावजूद हो सकता है, अन्य भाजपा शासित राज्यों में भी धारा-370 खात्मे की पांचवीं बरसी ऐसे ही दिवस के रूप में मनायी जाए । 




भाजपा नेता एक ही जुमले की दुहाई हमेशा हर जगह देते हैं कि धारा-370 हटाए जाने से जम्मू व कश्मीर में शांति और विकास का नया युग शुरू हुआ । सुप्रीम कोर्ट में इस पर चली सुनवाई के दौरान भी भाजपा गठजोड़ सरकार ने यही दलील दी, जिसे चीफ जस्टिस डी॰ वाई॰ चन्द्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने ठुकरा दिया । भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी॰ वाई॰ चन्द्रचूड़ ने कहा कि केंद्र सरकार के विचार धारा-370 हटाने के निर्णय को चुनौती देनेवाली याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों से कोई ताल्लुक नहीं रखते, क्योंकि यह मामला पूरी तरह संवैधानिक चुनौती से जुड़ा है । धारा-370 खत्म किए जाने के सरकार के फैसले की संवैधानिक वैधता को चुनौती देनेवाली याचिकाओं पर 2 साल तक सुप्रीम कोर्ट ने विचार नहीं किया । अगस्त, २०२३ में सुनवाई शुरू हुई, जब आम चुनाव करीब आया और जम्मू व कश्मीर में भी विधान सभा चुनाव कराने की आवाजें तेज होने लगी । 

11 दिसंबर, २०२३ को सुनाए गए अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट पीठ ने धारा-370 के क्लाउज (3) का हवाला देते हुए इसे हटाने के केंद्र के फैसले को सही ठहराया, क्योंकि इस क्लाउज में राष्ट्रपति के पास इसे खत्म करने का अधिकार है । लेकिन साथ-साथ जम्मू व कश्मीर का राज्य का दर्जा भी खत्म किए जाने और विधान सभा चुनाव टालने के लिए केंद्र को लताड़ा । 30.09.2024 तक चुनाव कराने का डेडलाईन सुप्रीम कोर्ट ने दे दिया । 

शांति के नए युग का आलम ये है कि जम्मू क्षेत्र में हिंसा पर काबू पाना संभव नहीं हो पा रहा है । सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दलील दी कि तीन दशकों की आतंकी हिंसा के बाद धारा-370 हटाने से जनजीवन सामान्य हुआ है । लेकिन ताजा हालात ये है कि आतंकी हमले कश्मीर की जगह जम्मू में केंद्रित हो गए हैं । यह सेना और सुरक्षा बलों के लिए नयी चिंता का विषय है । 25.02.2022 को ४ हिजबुल मुजाहिदीन समर्थकों को हथगोले और एके-47 गोलियों के साथ पहली बार पकड़ा गया । उसके बाद से आतंकी हमले जारी है । 

लोकसभा चुनाव में प्रतिष्ठित बारामुला सीट से जम्मू व कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और धारा-370 वापसी के लिए बने गुपकार दलीय गठजोड़ के प्रमुख घटक नेशनल कान्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला 2 लाख से ज्यादा वोट से हारे । उनको हरानेवाला इंजीनियर अब्दुल राशिद 2017 आतंकी फंडिंग मामले में यूएपीए (गैर कानूनी गतिविधियां रोक कानून) के अंतर्गत तिहाड़ जेल में बंद है । जेल से ही चुनाव लड़कर जीता और कड़ी सुरक्षा में लोकसभा सदस्यता की शपथ लेने के बाद से जेल में ही ही है । कश्मीर की जनता के रूझान का धारा-370 हटाये जाने के बाद का सेमी फाइनल है ये । एक अन्य प्रतिबंधित आतंकी गुट ‘जमात-ए-इस्लामी’चुनाव में हिस्सा लेने को उत्साहित है । केंद्र से वार्ता जारी है, इस गुट को यूएपीए प्रतिबंध हटाने का इंतजार है । 

अभी तक कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में है, जो पीओके कहलाता है । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने धारा-370 हटाने के बाद दावा किया कि जवाहर लाल नेहरू द्वारा की गयी ‘भयंकर भूल’को 72 साल बाद सुधारा गया । २०२४ लोकसभा चुनाव ने कश्मीर का दोबारा धर्म के आधार पर विभाजन कर दिया । इसलिए भाजपा ने कश्मीर क्षेत्र में अपने उम्मीदवार खड़े नहीं किए । जम्मू से भाजपा जीती । जम्मू व कश्मीर से अलग किए गए लद्दाख में मुसलमान उम्मीदवार खड़े करने की मांग उठी । लेह जिले से बौद्ध उम्मीदवार प्रायः जीतते रहे हैं, जिनकी आबादी ज्यादा है । इस बार मुस्लिम बहुल आबादी वाले क्षेत्र कारगिल से खड़े हुए निर्दलीय हाजी हनीफा जान ने भाजपा के ताशी ग्यालसन को हराया । जलवायु एक्टिविस्ट, सोनम वांगचुक ने लद्दाखियों के अलग राज्य और दो लोकसभा सीटों की मांग को लेकर फिर धमकी दी है कि जल्द ठोस वार्ता करें, वरना १५ अगस्त तक फिर अनशन शुरू किया जाएगा । भारी जनसमर्थन के साथ वांगचुक ने मार्च - अप्रील में 66 दिनों का अनशन किया, जो लोकसभा चुनाव के मद्देनजर 10 मई को स्थगित कर दिया था ।