संविधान दिवस बना राजनीतिक न्यायिक मतभेद मंच

                                                                                             - शशिधर खान

	




		बायकाट करनेवाले विपक्षी दलों ने सरकार पर सांविधानिक मूल्यों के अनादर और संसदीय लोकतंत्र की उपेक्षा का आरोप लगाया । 

		संसद भवन वाले समारोह में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठजोड़ के घटक दलों के अलावे बीजू जनता दल, वाईएसआर कांग्रेस, तेलंगाना राष्ट्र समिति और तेलुगू देसम पार्टी के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया । इसमें राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू भी बोले । जनवरी में संसद के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन में राष्ट्रपति के संबोधन भाषण का भी विपक्ष ने बायकाट किया । 



		प्रधानमंत्री की रही-सही कमी उनके अटोर्नी जनरल के॰ के॰ वेणुगोपाल ने पूरी कर दी । उन्होंने कहा कि संविधान अपनाने के 72वें वर्ष में भी जब सुप्रीम कोर्ट को देखते हैं तो पाते हैं कि शीर्ष कोर्ट हाईकोर्टों के हर फैसले के खिलाफ अपीलों को सुनती हैं । ऐसे में 2008 से लंबित आपराधिक और 2009 से लंबित दिवानी मामलों की अपीलें कब निबटायी जाएंगी । सरकार के अनुसार तो राजनीतिक विरोधियों को ‘देशद्रोह’के मुकदमे में फंसाने के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई और उस पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रूख भी ‘विपक्ष कार्य’के बाधक है । सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस एन॰ वी॰ रमना ने रक्षात्मक जवाब में कहा कि अदालतें जब भी न्यायिक हस्तक्षेप करती हैं तो यह सरकार को जगाने के लिए किया जाता है, न कि उसकी भूमिका को हड़पने यानी शक्तियां लेने के लिए । चीफ जस्टिस ने संविधान के तीनों अंगों के बीच खींची गयी लक्ष्मण रेखा को पवित्र बताया । लक्ष्मण रेखा का सबसे ज्यादा रावणी उल्लंघन करके भाजपा गठजोड़ सरकार ने अपवित्र किया है । सीबीआई निदेशक और सीवीसी प्रमुख के कार्यकाल पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय मानदंड की काट में सरकार ने हाल ही में अध्यादेश जारी किया है । कुछ दिन पहले न्यायिक ट्रिब्यूनलों पर भी सुप्रीम कोर्ट को नोटिस जारी करना पड़ा । सीबीआई वाले अध्यादेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई अभी होनी है । जस्टिस एन॰ वी॰ रमना ने जजों पर हमले और खासकर सोसल मीडिया के हमले पर चिंता जतायी । 

		विज्ञान भवन में सुप्रीम कोर्ट वाले समारोह के दूसरे दिन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जजों से कहा कि वे कोर्ट में क्या बोलते हैं, इसके प्रति सचेत रहे । इसके लिए उन्होंने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट जजों का हवाला दिया । 

		चीफ जस्टिस ने सरकार को चेताया कि कानूनों के असर का अध्ययन किए बगैर ही विधायिका कानून पारित कर रही है, जो एक बड़ी समस्या बननेवाली है । उन्होंने चेक बाउंसिंग (धारा 138) का उदाहरण दिया । संसद ने निगोशिएबल इंस्ट्रुमेंट एक्ट को आपराधिक बना दिया, लेकिन यह नहीं देखा कि इससे मजिस्ट्रेट अदालतें बेहद दवाब में आ गयी हैं । 

		तीनों कृषि कानूनों के कार्यान्वयन पर किसान आंदोलन के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी थी । सरकार आंदोलन खतम कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट से मदद मांगने गयी । सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विरोध, आंदोलन के अधिकार पर रोक नहीं लगायी जा सकती । अब कृषि कानून वापस लेने के सरकार के फैसले के बाद किसान आंदोलन पर शीर्ष कोर्ट 7 दिसंबर को सुनवाई करेगी । 

		धारा-370 खतम करनेवाला जम्मू व कश्मीर पुनर्गठन कानून, २०१९ के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक सुनवाई शुरू नहीं की है । इसका कारण टकराव टालना हो सकता है । २०१९ में संविधान दिवस की 70वीं वर्षगांठ पर आयोजित संसद के दोनों सदनों के विशेष संयुक्त अधिवेशन के राष्ट्रपति संबोधन का विपक्षी दलों ने 05/08/2019 को मानसून सत्र में पास उस बिल के कारण बायकाट किया ।