दुनिया भर में हो रही भारत चर्चा पर नजर

 - शशिधर खान

	







नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) की आम चुनाव ऐलान से पहले जारी अधिसूचना अभी ऐसा ही मामला बना हुआ है । सीएए लागू करने के नियम की अधिसूचना 11 मार्च को जारी होते ही अमेरिकी विदेश विभाग ने इसे अपनी रोजाना मीडिया ब्रीफिंग में शामिल कर लिया । अमेरिकी विदेश विभाग प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने 11 मार्च को ही कहा कि रमजान के महीने में जारी की गयी मुस्लिम समुदाय पर केंद्रित सीएए अधिसूचना भारतीय संविधान में सर्वधर्म समभाव की भावना के खिलाफ है । उसके बाद अमेरिकी सीनेट विदेशी सम्बन्ध कमिटी के अध्यक्ष बेन कार्डिन ने भी इसी से मिलती-जुलती टिप्पणी की । सीनेटर बेन कार्डिन ने सीएए अधिसूचना जारी होने के समय को रमजान महीने के साथ-साथ मानवाधिकार से भी जोड़ा । दोनों ही अमेरिकी टिप्पणी की प्रतिक्रिया में भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ‘गलत जानकारी’और ‘अवांछित’बताकर खारिज कर दिया । विदेश मंत्री एस॰ जयशंकर ने भी सफाई दी । लेकिन चर्चा समाप्त नहीं हुई । 





चुनावी बांड पर एसबीआई की पेशी के दिन 18 मार्च को सुप्रीम कोर्ट पीठ के एक जज बी॰ आर॰ गवई ने मुकुल रोहतगी को कहा कि ‘सारा कुछ दुनिया जान रही है ।’रोहतगी चुनावी बांड खुलासा पर रोक लगाने की सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन अर्जी की ओर से पेश हुए थे । 


ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन नेता ओबैसी ने इस आधार पर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर रोक लगाने की गुहार लगायी है कि सीएए नियम अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश में रह रहे अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों को फास्ट ट्रैक भारतीय नागरिकता पाने के लिए हिन्दू धर्म अपनाने का प्रलोभन देनेवाला है । बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक नहीं लगायी और केंद्र सरकार को जवाब देने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया । इस पर दुनिया में क्या और कैसी चर्चा होगी ?

‘एक देश एक चुनाव’पर विचार के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में गठित कमिटी की रिपोर्ट आ जाने के बावजूद जम्मू व कश्मीर विधान सभा चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ न कराए जाने पर वहां के नेता के बयानों पर दुनिया की चर्चा को किस रूप में देखा जाए । 












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