राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को लेकर नया विवाद
- शशिधर खान
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), २०१९ लागू होते ही जगह-जगह हिंसा भड़की और केंद्र सरकार को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) तथा राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) का काम ढीला करना पड़ा । असम में बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण ही मुख्य रूप से नागरिकता संशोधन कानून बनाया गया, जिसे असम के बाद पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में भी लागू करके राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर तैयार करवाने की केंद्र की योजना थी । विवाद के कारण राष्ट्रीय स्तर पर यह काम रोक दिया गया, क्योंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में था । फिर उसके बाद कोरोना वाली बाधा सामने आ गयी । लेकिन असम में एनआरसी तैयार करवाने का काम कोरोना से पहले विवाद के बावजूद सीधे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जारी रहा और कोरोना के लगभग काबू में आने के बावजूद विवाद नया रंग लेता चला गया । विवादित पहलू के तीन पक्ष हैं और आमने-सामने हैं । सुप्रीम कोर्ट, असम सरकार और एनआरसी कोऑर्डिनेटर तीनों के बीच रस्साकसी के बीच राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर विवाद झूल रहा है ।
ताजा विवाद वर्तमान एनआरसी, कोऑर्डिनेटर हितेश देव सरमा ने अपने पूर्ववर्ती प्रतीक हाजेला के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराकर खड़ा किया है । प्रतीक हाजेला ने सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में अगस्त, २०१९ में एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) तैयार किया था, लेकिन उसको लेकर असम की भाजपा सरकार ने विवाद पैदा किया । प्रतीक हाजेला पर आरोप लगा कि उन्होंने ‘कई अयोग्य व्यक्तियों का नाम एनआरसी में शामिल कर लिया ।’ उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के ही आदेश से प्रतीक हाजेला का तबादला असम से बाहर मध्य प्रदेश कर दिया गया । असम सरकार ने प्रतीक हाजेला की जगह हितेश देव सरमा को नवंबर, २०१९ में एनआरसी कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया, जो पहले से ही विवाद के घेरे में थे । हितेश देव सरमा की सोसल मीडिया पर टिप्पणियों के बारे में कथित सांप्रदायिक पूर्वाग्रह से ग्रसित आरोप लगते रहे, लेकिन राज्य सरकार के लिए वे ‘सही सोच’ वाले व्यक्ति थे । उस वक्त भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल थे, जिन्होंने विदेशी (बांग्लादेशी) घुसपैठियों की पहचान करके उन्हें स्वदेश भेजने और सिर्फ असमियों को नागरिकता प्रदान करने की मुहिम चलायी । भाजपा के इस पुराने एजेंडे को सुप्रीम कोर्ट सबसे पहले सोनोवाल ही ले गए । २०२१ में दोबारा असम में भाजपा की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा मुख्यमंत्री बने और हितेश देव सरमा सत्तारूढ़ दल के एनआरसी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए नए विवाद गढ़ने में जुटे ।
मई, २०२२ के अंतिम सप्ताह में एनआरसी कोऑर्डिनेटर ने असम पुलिस सीआईडी के पास दर्ज शिकायत में लिखा कि उनके पूर्ववर्ती प्रतीक हाजेला ने राज्य में एनआरसी अपडेट प्रक्रिया के संचालन में कथित रूप से ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’को खतरे में डाल दिया । शिकायत के अनुसार प्रतीक हाजेला का काम अपने कर्त्तव्यपालन में लापरवाही के साथ-साथ यह भी कहा जा सकता है कि उन्होंने ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’को भी खतरे में डालने वाला काम किया । हितेश देव सरमा ने शिकायत की प्रति गृह और राजनीतिक विभाग को भी भेजी, जिसमें हाजेला पर भ्रष्ट तथा पूर्वाग्रह से ग्रसित होने का आरोप लगाया ।
उसके पांच दिन बाद 25/05/2022 को असम के एक सीएए (नागरिकता संशोधन कानून) विरोधी संगठन की ओर से हितेश देव सरमा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस एन॰ वी॰ रमना को पत्र लिखे जाने की खबर गुवाहाटी से आयी । सीएए के खिलाफ बने इस ग्रुप सीएए विरोधी समन्वय समिति की ओर से उस पत्र की प्रति मीडिया को जारी की गयी । पत्र में भारत के मुख्य न्यायाधीश को लिखा गया है - ‘सुप्रीम कोर्ट ने एनआरसी की मानीटरिंग स्वयं की, जिसका मकसद अखंडता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना था । इसलिए सभी जिम्मेदार तबके के लोगों ने माना कि यह अवश्य ही सही दस्तावेज है और इसमें किसी प्रकार के संदेह की गुंजाइश नहीं है । लेकिन असम सरकार ने जब से हितेश देव सरमा को कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया है, सब कुछ शक और गलत इरादे के घेरे में है । हितेश देव सरमा ने कार्यभार संभालने के पहले ही दिन से एनआसी की रिपोर्ट पर सवाल उठाया और लाखों विदेशियों पर जंगली तरीके से फर्जी आरोप लगाकर उन्हें नागरिकता सूची से बाहर कर दिया है ।’
पत्र पर दस्तखत इस ग्रुप के अध्यक्ष हीरेन गोहेन और मुख्य कोऑर्डिनेटर देवेन तामुली ने किए हैं । 2016 में कांग्रेस की तरूण गोगोई सरकार को हराकर भाजपा असम में सत्ता में आयी । भाजपा मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने जब हितेश देव सरमा को एनआरसी कोऑर्डिनेटर बनाया तो उसका व्यापक विरोध हुआ । कांग्रेस संसद सदस्य अब्दुल खालिफ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर हितेश देव सरमा को फेसबुक पोस्टों का हवाला देते हुए कहा कि हितेश देव ‘न भरोसे के योग्य हैं, न ही निष्पक्ष ।’ऑल इंडिया अल्पसंख्यक छात्र संघ ने भी कांग्रेस सांसद की ही तरह सर्बानंद सोनोवाल से हितेश देव सरमा की नियुक्ति पर पुनर्विचार करने कहा । हितेश देव सरमा के एक सोसल मीडिया पोस्ट को लेकर तो इतना बवाल मचा कि सुप्रीम कोर्ट का भी ध्यान उस तरफ गया । हितेश देव सरमा ने प्रतीक हाजेला की एनआरसी रिपोर्ट के बारे में पोस्ट किया - ‘लाखों बांग्लादेशी एनआरसी में हैं ।’सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए हितेश देव सरमा से वो विवादित पोस्ट डिलिट करने कहा और स्पष्टीकरण मांगा । उसकी वजह से हितेश देव सरमा नियुक्ति के तीन महीने बाद जनवरी, २०२० में एनआरसी कोऑर्डिनेटर का कार्यभार ग्रहण कर पाए, जब मामला दब गया । आज की तारीख में 19 लाख लोगों का भविष्य अधर में लटका है, जिनके बारे में तय नहीं हो पा रहा है कि उन्हें असमिया माना जाए या नहीं ।
सुप्रीम कोर्ट की ही निगरानी में विदेशियों की पहचान के लिए बने विदेशी ट्राइबुनल के काम पर भी हितेश देव सरमा ने सवाल उठा दिया है । प्रतीक हाजेला के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज कराने से पहले हितेश देव सरमा ने कहा कि ‘असम सरकार ने 31/08/2019 को जारी एनआरसी सूची को फाइनल नहीं माना है और अभी फाइनल सूची तैयार करने की प्रक्रिया जारी है । इसके खिलाफ विदेशी ट्राइबुनल के एक सदस्य ने चेताया कि विदेशी ट्राइबुनल के काम में दखल न दें, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में फाइनल सूची २०१९ में प्रकाशित की जा चुकी है ।’
इन विवादों से बेखबर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मई, २०२२ के पहले सप्ताह में कोलकाता में कहा कि कोरोना खतम होने के बाद पश्चिम बंगाल में सीएए लागू करेंगे । फिर उसके बाद 10 मई को गुवाहाटी में अमित शाह ने कहा कि बंगाल सरकार घुसपैठ रोकने में सहयोग नहीं कर रही है । विवाद के कारण २०२१ में बंगाल और असम विधान सभा चुनाव में सीएए की चर्चा किसी भाजपा नेता ने नहीं की ।
12/12/2019 को सीएए लागू होने के बाद देश के विभिन्न राज्यों में भड़की हिंसा, दंगा ने राजनीतिक करामात किए । दिल्ली में महीनों चले शाहीनबाग धरना के समर्थन से आम आदमी पार्टी सरकार को फरवरी, २०२० में फिर से भारी बहुमत मिला । दंगे में गिरफ्तार अभी तक ‘राजद्रोह’ के जुर्म में अदालतों का चक्कर लगा रहे हैं । उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने हिंसा तोड़फोड़ पर काबू पाने के लिए हर्जाना वसूली का ऐसा तुगलकी फरमान जारी किया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मामला गया । राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को लेकर नया विवाद
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