बसंत गीत

जिंदा जलते भाई सड़क पर

हम सब मिलकर गावें फाग

क्यू में खड़े किरासन खातिर

देखें कहां लगी है आग

भूलो सारे रिश्ते नाते

काटो लाल लग्न के ताग

टीवी पर मत देख तमाशा

दौड़ जहां लुट रहा सुहाग

कर्कश स्वर में कोयल कूके

मीठी तान सुनाता काग

ये फुलबगिया अब न बचेगी

मुंह से निकल रहा है झाग

खेतों में चिमनी का सरगम

कहां पाएं सरसों का साग

रोटी नीमक पर भी आफत

ऐसे में क्या राग विराग

कचरा ढोती नदिया क्या दे

मस्त फिजां का कोई सुराग

आसमान से लहू टपकता

बादल निकल गया बेदाग

फूल से चेहरे मुरझाए हैं

खो बैठे हैं बाग पराग

देख पड़ोस में धुंआ उठ रहा

अरे स्वार्थी अब भी जाग