धार्मिक भावना की राजनीति और सोसल मीडिया
- शशिधर खान
इस्लाम से ज्यादा भाजपा विरोधी चर्चों के राजनीतिक प्रभुत्व वाले पूर्वोत्तर की दशा-दिशा भाजपा ने बदल दी । यह देश का ऐसा उपद्रवग्रस्त क्षेत्र है, जहां हर राज्य में दर्जनों उग्रवादी गुट अलग अस्तित्व के लिए आंदोलन कर रहे हैं । उग्रवाद का संचालन और उसके राजनीतिक इस्तेमाल की नीति चर्चों के पादरी तय करते हैं । इन राज्यों में अभी तक कांग्रेस सत्ता में थी और उग्रवादी गुटों से चुनावी तालमेल पर्दे के पीछे से चर्च के इशारे पर होता है । लगभग सभी उग्रवादी गुट इसाई हैं । आजादी से पहले ही चर्च के उकसावे पर पूर्वोत्तर में अलगाववाद की नींव रखनेवाले एनएससीएन (नेशनल सोसलिस्ट काउंसिल और नगालिम) समेत तमाम नगा गुटों के नेता इसाई हैं ।
हिन्दू और मुस्लिम राजनीतिक दुर्भावना का हाल जानने के लिए त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल चलें । त्रिपुरा में भाजपा को कई दशकों से लगातार चली आ रही मार्क्ववादी कम्यूनिस्ट पार्टी सरकार को हटाकर सत्ता में आने का मौका मिला है । बांग्लादेश में दशहरा के समय पूजा पंडाल के मंडप में कुरान रखने की खबर सोसल मीडिया पर वायरल होने के बाद हिन्दुओं के खिलाफ हमले का असर इन दोनों राज्यों में अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में नजर आया । क्योंकि त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में ज्यादातर मतदाता 1971 के बांग्लादेश युद्ध के बाद वहां से भागकर आए बांग्ला भाषी मुसलमान हैं ।
28 अक्टूबर को बांग्लादेश के सूचना और प्रसारण मंत्री एम. हसन महमूद कोलकाता प्रेस क्लब में सफाई दे रहे थे कि सांप्रदायिक तनाव पैदा करने के लिए विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात जिम्मेदार है । उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर हमला करके सांप्रदायिक तनाव पैदा करनेवालों के खिलाफ ‘कड़े कदम’उठाये हैं ।
28 अक्टूबर को ही त्रिपुरा पुलिस उत्तरी त्रिपुरा के रामनगर में मस्जिद पर हुए हमले को सोसल मीडिया द्वारा फैलायी गयी अफवाह बता रही थी । भारत बांग्ला सीमा पर स्थित इस मस्जिद को विश्व हिन्दू परिषद समर्थकों की रैली में नुकसान पहुंचाया गया । बांग्लादेश में सांप्रदायिक हिंसा 18 अक्टूबर को भड़की थी । उसकी प्रतिक्रिया में त्रिपुरा में मस्जिद पर हुए हमले के जवाब में उनाकोटी जिले में काली मंदिर की बाड़ क्षतिग्रस्त करने और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक नेता पर 30 अक्टूबर को चाकू से हमले हुए । निषेधाज्ञा लागू करनी पड़ी । उत्तरी त्रिपुरा जामा मस्जिद के इमाम मौलाना अब्दुल रहीम चौधुरी ने एक दर्द भरी बात कही कि 30 वर्षों में ऐसी सांप्रदायिक हिंसा पहले कभी नहीं देखी गयी ।
उसी दिन पाकिस्तान के सिंघ प्रांत स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर से नकदी और मूर्तियों के जेवरात लूटने की खबर आयी । याद रहे कि कुछ दिन पहले देवी मंदिर में तोड़फोड़ के खिलाफ पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रूख अपनाया और सरकार को उसके पुनर्निर्माण का आदेश दिया ।
राजनीतिक स्वार्थ के लिए धर्म के इस्तेमाल से ज्यादा सोसल मीडिया अनसोसल बातों से सामाजिक समरसता को नुकसान पहुंचा रही है ।
दिल्ली हाईकोर्ट ने 29 अक्टूबर को हिंदू देवी से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री हटाने को आदेश ट्विटर को दिया । बांग्लादेश के सांप्रदायिक हिंसा फैलने का कारण यह सामने आया कि एक फेसबुक पोस्ट से अफवाह फैली कि रंगपुर जिले के पीरगंज गांव में किसी ने ‘धर्म का अपमान’किया है ।
उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव प्रचार में मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करनेवाले कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी समेत सबका टोन बदला हुआ है, मायावती अयोध्या के बाद मथुरा, वृंदावन के भी मंदिर निर्माण का चुनाव सभाओं में समर्थन कर रही हैं । कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी को रैलियों में देवी पाठ और ‘हर-हर महादेव’जाप करते सुना गया । धार्मिक भावना की राजनीति और सोसल मीडिया
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